नवादा : जिले के किसानों की गाढ़ी कमाई को सहजता से उर्वरक विक्रेता मुनाफाखोरी कर रहे हैं। 1350 रुपये प्रति बैग वाला डीएपी को किसान 1650 से 1700 रुपये में खरीदकर अपने खेतो में डाल रहे हैं। कमरतोड़ मंहगाई में किसानों को खेती करना घाटे का कार्य साबित हो रहा है। परेशान किसान अपनी धान के उत्तम कोटि की फसल को औने-पौने कीमत पर बिक्री करने को मजबूर हैं। उर्वरक विक्री की पड़ताल के दौरान कुछ दुकानदारों ने बताया कि थोक विक्रेता द्वारा ही उर्वरक महंगा दिया जा रहा है, साथ ही दवा बिक्री करने की बाध्यता होती है।
खाद दुकानदार शिव रतन प्रसाद, महेंद्र प्रसाद, युगल प्रसाद समेत अन्य उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि मंहगा खरीदकर सस्ता बिक्री संभव नहीं है। दूसरी ओर, विस्कोमान को इतना कम डीएपी उपलब्ध करवाया जाता है जो ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत को चरितार्थ करती है। बाजार में यूरिया के 45 केजी का बैग 350 से 360 रुपये में मिल रहा है, जबकि पारस डीएपी जिसमें रसायन की मात्रा 12:32:16 रहती है बाजार मूल्य 1950 रुपये से दो हजार रुपये तक है, जबकि अन्य कंपनियों का डीएपी जिसमें रसायन की मात्रा कम होती है थोड़ी कम कीमत पर मिल रही है।
कोई भी डीएपी सरकार विस्कोमान काफी कम भेजती है। 20:20:13 मात्रा का डीएपी की बाजार मुल्य 1550, यूरिया की बाजार कीमत 266 की जगह 350 रुपये प्रति बैग हो जाती है। जबकि अन्य कंपनियों के डीएपी की कीमत आसमान छू रही है। किसान उपेंद्र सिंह, कुंदन सिंह, बिक्की कुमार, देवन महतो, गंगा यादव, अभिमन्यु सिंह, सुबोध सिंह आदि बताते हैं कि जब भी किसानों को उर्वरक की आवश्यकता होती है। उर्वरक कालाबाजारी का शिकार हो जाता है। ऐसे में किसानों को जेबें ढीली करने की मजबूरी होती है।
अधिकारियों का तर्क किसान लिखित शिकायत करें होगी कार्रवाई
कृषि विभाग के अधिकारियों का तर्क होता है कि यदि किसान लिखित शिकायत करेंगे तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। इस बीच किसान किसी तरह से महंगी खाद खरीदकर खेती कर रहे हैं। किसान लिखित शिकायत के झंझट में पड़ना नहीं चाहते। लिहाजा, मनमानी कीमत लेने वाले खाद दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। जरूरत है औचक निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई करने की। रबी सीजन में डीएपी की अधिक मांग रहती है। ऐसे में दुकानदार मुनाफाखोरी करते हैं।
भईया जी की रिपोर्ट