IRCTC घोटाले में लालू पसाद यादव और राबड़ी देवी के साथ तेजस्वी यादव भी अब चार्जशीटेड हो गए हैं। इससे उनका सियासी करियर न सिर्फ दांव पर लग गया बल्कि दागदार भी हो गया। चारा घोटाले में सजायाफ्ता होने का दंश उनके पिता लालू यादव तो झेल ही रहे हैं, अब तेजस्वी का भी सीएम बनने के सपने पर ग्रहण लग गया है। इसका उन्हें एक तात्कालिक नुकसान तो यह झेलना ही पड़ेगा कि शायद अब कांग्रेस उन्हें सीएम फेस घोषित करने को तैयार ही न हो। क्योंकि पहले से ही तेजस्वी के महागठबंधन का सीएम फेस घोषित करने पर कांग्रेस ने पेंच फंसा रखा है। वहीं दूसरी तरफ अदालत के इस आदेश के बाद एनडीए हमलावर हो गई है। खासकर JDU ने तो यहां तक कह दिया कि इस घोटाले में तेजस्वी के पिता लालू ने अपने भाई और चचेरे ससुर को भी नहीं छोड़ा और उनसे भी जमीन लिखवा ली।
चुपचाप सरेंडर कर मुकदमा लड़े तेजस्वी
दरअसल बिहार चुनाव से ठीक पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज बहुचर्चित आईआरसीटीसी घोलाले में पूर्व रेलमंत्री लालू, तेजस्वी और राबड़ी समेत कुल 14 आरोपियों पर मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया। कोर्ट ने इस मामले में इन सभी के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने का आदेश जारी किया। बिहार चुनाव से ठीक पहले तेजस्वी समेत लालू एंड फैमिली पर आरोप गठन के इस अदालती आदेश के बाद आरजेडी ने इस निर्णय की टाइमिंग पर सवाल उठाए। राजद के इसी सवाल के जवाब में जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने जमकर पलटवार किया। उन्होंने राजद से ही उल्टा पूछ लिया कि अगर ऐसा था तो लालू—तेजस्वी के वकीलों ने कोर्ट में यह मामला क्यों नहीं उठाया। आप टाइमिंग की बात करते हैं, तेजस्वी ने जब कोर्ट में कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे तो अब टाइमिंग का सवाल क्यों? चुपचाप सरेंडर करिये और मुकदमा लड़िये।
नीरज कुमार ने कहा है कि लालू यादव के वकीलों ने न्यायालय में टाइमिंग का मामला क्यों नहीं उठाया। तेजस्वी यादव को सरेंडर करने की सलाह देते हुए जदयू नेता ने यह आरोप लगाया कि इस घोटाले में लालू ने अपने बड़े भाई और राबड़ी देवी के चाचा से भी जमीन लिखवा लिया। इन लोगों ने रिश्तों का भी खयाल नहीं रखा और उनको भी नहीं छोड़ा। अब जो पाप किया है, उसे तो भुगतना ही पड़ेगा। जदयू नेता ने कहा कि लालू ने अपने बड़े भाई स्व. मंगरू राय के परिजन को रेलवे में नौकरी दी तो बदले में उनसे फुलवरिया की जमीन लिखवा ली। इसी तरह लालू जी ने अपने चचेरे ससुर और पत्नी राबड़ी देवी के चाचा नाटा चौधरी के परिजन को नौकरी दी तो उनसे भी जमीन लिखवा ली। तेजस्वी, लालू और उनके परिवार के खिलाफ 420 और 120 बी का आरोप लगा है। उनके खिलाफ आरोप गठन का आदेश एक स्वाभाविक अदालती प्रक्रिया है जिसका बिहार के चुनाव से कोई ताल्लुक नहीं है।