दरभंगा/ढ़ाका। बिहार विधान सभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन के द्वारा बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में शामिल है। यह वोट अधिकार यात्रा दरभंगा से शुरू होकर सीतामढ़ी होते हुए ढ़ाका पहुंच चुकी है, लेकिन इसका असर पूरे क्षेत्र में राजनीतिक ऊर्जा के रूप में महसूस किया जा रहा है। कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि इस यात्रा ने कार्यकर्ताओं को जहां नया जोश और उत्साह दिया है, वहीं एनडीए के खिलाफ जनमत को भी एकजुट करने में कामयाबी हासिल की है। दरभंगा में राहुल गांधी का यह छह महीने में दूसरा दौरा रहा, जिसे स्थानीय कार्यकर्ता ऐतिहासिक क्षण बता रहे हैं। उनका मानना है कि कई दशकों बाद कांग्रेस के पक्ष में एक सकारात्मक लहर बनती दिख रही है।
दरभंगा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मालूम हो कि इस पहले दरभंगा लोकसभा सीट पर कांग्रेस की आखिरी जीत 1980 में हरिनाथ मिश्रा के नाम दर्ज है। इसके बाद यहां भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत की और 2014 व 2019 में गोपालजी ठाकुर को लगातार जीत मिली। 2004 में एकमात्र बार राजद के अली अशरफ फातमी को जीत मिली थी। विधानसभा की बात करें तो 2020 में 10 में से 9 सीटों पर एनडीए का कब्जा रहा था। ऐसे में राहुल गांधी की यात्रा को महागठबंधन एक निर्णायक मोड़ के रूप में देख रहा है।
महागठबंधन का बड़ा आरोप : 65 लाख वोट की चोरी
राजद नेता शत्रुघ्न यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए ने पिछले चुनावों में 65 लाख वोट की चोरी की थी। उनके मुताबिक राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यह यात्रा लोकतंत्र की रक्षा और वोट की सुरक्षा के लिए है। उनका दावा है कि इस बार मिथिलांचल की सभी 10 लोकसभा सीटों पर जीत महागठबंधन की होगी।
क्या बदलेगा मिथिलांचल का राजनीतिक समीकरण?
1952 से लेकर 1990 तक दरभंगा कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन इसके बाद भाजपा और जनता दल ने क्षेत्रीय वर्चस्व स्थापित किया। अब महागठबंधन का कहना है कि वोटर अधिकार यात्रा के जरिए मिथिलांचल से सत्ता परिवर्तन की शुरुआत होगी। राहुल गांधी की यात्रा ने निश्चित रूप से एनडीए को इस क्षेत्र में चुनौती की स्थिति में ला खड़ा किया है। अब असली परीक्षा यह होगी कि यह लहर वास्तव में वोटों में तब्दील हो पाती है या नहीं।