पुण्यतिथि : रामजी मिश्र मनोहर कालजयी पत्रकार

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पटना : प्रख्यात पत्रकार रामजी मिश्र मनोहर की 21वीं पुण्यतिथि पर रामजी मिश्र मनोहर मीडिया फाउंडेशन के तत्वाधान में पत्रकारिता कल और आज विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में बिहार के चोटी के पत्रकार और साहित्यकार शामिल हुए। इस अवसर पर वक्ताओं ने रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता और उनकी पत्रकारिता में संदर्भ मूल्य पर विस्तार से चर्चा की।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडे ने कहा कि रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता एवं बेदाग जीवन पत्रकारों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि कालजयी पत्रकार होने के लिए संवेदनशील और समाज की समस्याओं की समझ और उसे व्यक्त करने के लिए भाषा का होना आवश्यक है, जो कि आज के समय में भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि रामजी मिश्र मनोहर को अपनी जन्मभूमि और अपने समाज से प्रेम था, यह उनके जीवन और पत्रकारिता में स्पष्ट दिखता है।

वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र मिश्र ने रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके संरक्षण व निर्देशन में कई बड़े पत्रकार बने। पत्रकारिता उनके लिए नौकरी नहीं थी बल्कि, एक मिशन थी। भाषा भारती के संपादक नितिन नाथ गुप्त ने कहा कि रामजी मिश्र मनोहर ने पत्रकार के रूप में जो लिखा वह आज भी प्रासंगिक है उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र के बिछड़े हुए अतीत को उन्होंने जिस ढंग से सहेजा है वह अद्भुत एवं उपयोगी है। पत्रकार संजीव कुमार ने रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता को मूल्य आधारित बताया पत्रकार कृष्ण कांत ओझा ने कहा की रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता में जो मौलिकता थी वह सराहनीय एवं अनुकरणीय है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ ने कहा कि रामजी मिश्र मनोहर की पत्रकारिता कालजयी और आज के पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश करने वाली है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक दास्ताने पाटलिपुत्र आज की पत्रकारिता के लिए दिशा देने वाली है। इस अवसर पर रामजी मिश्र मनोहर के ज्येष्ठ पुत्र ज्ञान वर्धन मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता की पात्रता विकसित करने के मामले में मेरे पिता अत्यंत कठोर थे। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में मेरे परदादा के समय से पत्रकारिता की परंपरा शुरू हुई जो आज मेरे पुत्र के माध्यम से चल रही है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। वहीँ रामजी मिश्र मनोहर के द्वितीय पुत्र व पत्रकार पंकज वत्सल ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज की समस्याओं के समाधान विदिशा में शब्द साधना है। आज व्यवसायिक प्रभाव के कारण पत्रकारिता का चरित्र बदल रहा है, इसे स्वीकार करना होगा और इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास करना होगा।

इस अवसर पर पत्रकार ध्रुव कुमार जागो बहन पत्रिका के संपादक डॉ शांति ओझा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। साहित्य सम्मेलन सभागार में आयोजित रामजी मिश्र मनोहर स्मृति समारोह में वक्ताओं ने उनकी पुस्तक दास्ताने पाटलिपुत्र को फिर से प्रकाशित कराने पर जोर दिया।

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