प्रो प्रफुल्ल चन्द्र रॉय जयंती : रसायन शास्त्र दिवस मना कर किया गया याद

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DESK : 2 अगस्त 1861 को आधुनिक काल के प्रथम विश्व विख्यात वैज्ञानिक प्रो प्रफुल्ल चन्द्र रॉय का जन्म हुआ था। वह अपने संपूर्ण जीवन काल में देश भक्त और संन्यासी रहे।

इस बीच उनको अपना आदर्श मानते हुए मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रंजीत कुमार वर्मा ने अपनी याद साझा करते हुए बताया कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं उनकी शिष्य-परंपरा के वंश वृक्ष में उनके बाद की चौथी पीढ़ी का शिष्य हूँ । उन्होंने प्रो० पी०रे को पी-एच० डी० कराया जो प्रो०पी० सी० सिन्हा के पी-एच०डी० गुरू बने। मैंने प्रो एकबाल बहादुर सिंह के निर्देशन में पी-एच०डी० किया जो प्रो० पी० सी० सिन्हा के पी-एच०डी० शिष्य थे। ।

उन्होंने बताया कि हम उनके याद में प्रत्येक वर्ष 2 अगस्त को रसायन शास्त्र दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दौरान प्रत्येक वर्ष कोलकाता के राजा बाजार स्थित सायंस कॉलेज के रसायन शास्त्र भवन के तीसरे तल पर उनके संग्रहालय में उनके चित्र पर माल्यार्पण करने का सौभाग्य मुझे मिलता रहा है। वहाँ उनके द्वारा प्रयुक्त व्यक्तिगत सामग्रियाँ भी हैं जैसे छाता, पादुका आदि। लेकिन इस बार देश में आए कोविड-19 के कारण स्वयं न जा पा रहा हूँ। हालांकि वीडियो कॉन्फेरेन्सिंग के माध्यम से उनके चित्र पर प्रणाम कर आज दस बजे उनका आशीर्वाद लूँगा।

उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम प्रो प्रफुल्ल चन्द्र रॉय द्वारा 1924 में स्थापित इण्डियन केमिकल सोसायटी ने आयोजित किया गया है। प्रो प्रफुल्ल चन्द्र रॉय इण्डियन सायंस कांग्रेस की संस्थापक टोली में थे। उन्होंने एडिनबरा(इंग्लैंड) को छोड़ कर भारत को कर्मभूमि बनाया। शोध और विज्ञान को बढ़ाने में लगे रहे। भारत में दवाइयों की फैक्ट्री के जनक भी रहे। उन्होंने कई खोजें कीं। इसके अलावा उनके द्वारा प्रो आशुतोष मुखर्जी के साथ मिलकर कोलकाता को शोध केन्द्र भी बनाया गया।

swatva

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