भोजपुरी के विकास के लिए एकजुट प्रयास अपेक्षित: वशिष्ठ नारायण सिंह

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पटना : भोजपुरी समग्रता की भाषा है। इसकी व्याप्ति वैश्विक है। विश्व के कई देशों में भोजपुरी बोली जाती है। बावजूद इसके इसका अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। इसके लिए समेकित व एकजुट प्रयास की जरूरत है। उक्त बातें जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपने आवास पर भोजपुरी के विकास से जुड़े एक शिष्टमंडल से मुलाकात के दौरान कही।

शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे भोजपुरी अकादमी बिहार के पूर्व अध्यक्ष चंद्रभूषण राय ने भोजपुरी के विकास के लिए वशिष्ट बाबू से आगे आने की अपील की। प्रमोद कुमार सिंह के एक सवाल के जवाब में वशिष्ठ बाबू ने बताया कि भोजपुरी की जो संस्कृति रही है वह समाज को जोड़ने वाली और भाईचारे पर आधारित है। सहकारिता की संस्कृति का इससे बढ़िया उदाहरण विश्व में कहीं भी नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भोजपुरी के विकास के लिए तमाम भोजपुरी भाषी जनप्रतिनिधियों, बड़े अधिकारियों, लेखकों तथा सजग लोगों को एकजुट होकर आगे आना होगा। भोजपुरी के साहित्यकारों की रचनाओं का डॉक्यूमेंटेशन करना होगा। बिहार सहित झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के भोजपुरी भाषी लोगों को इससे जुड़ना होगा। यही नहीं भोजपुरी कलाकारों को भी इस अभियान का अंग बनाना जरूरी है। रवि किशन,मनोज तिवारी, पवन सिंह जैसे लोग आगे आए और भोजपुरी के विकास के इस अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करें।

उन्होंने भोजपुरी के महत्व को एक उदाहरण के साथ समझाया कि जब वे जयप्रकाश नारायण से मिले थे तो उन्होंने किस तरह से भोजपुरी में उनसे बातचीत की थी। हमसे पूछे कि का हो का हाल चाल बा? पानी वानी होता? हमरा हं कहला पर कहलन लागता की फसल अच्छा होई। वहां मौजूद अंग्रेजी और मराठी के संवाददाता यह सुनकर के अचंभित हुए की जेपी जैसा इतना बड़ा आदमी भी कैसे अपनी

swatva

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