पकड़ हुई ढीली तो याद आए कर्पूरी

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को डर सता रहा है कि कहीं उन्हें उनके बीच कार्यकाल में ही कुर्सी से हाथ न धोना पड़े। रविवार को पटना में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम नीतीश ने अप्रत्यक्ष तौर पर कुछ इसी तरह का इशारा किया।

आगे सीएम नीतीश ने कहा कि जननायक के साथ भी अन्याय हुआ था क्योंकि, उन्होंने अतिपिछड़ों को आरक्षण देने का काम किया था। जिससे, कुछ नाराज़ लोगों ने उन्हें लगभग 2 साल में ही पद से हटा दिया। हमलोग भी सबके हित में काम कर रहें हैं और लोग हम भी नाराज़ हैं। कभी कभी काम करने से भी लोग नाराज़ हो जाते हैं, हमनें कभी किसी की उपेक्षा नहीं कि जिसके कारण ही आज बिहार निरंतर आगे बढ़ रहा है। उक्त बातें सीएम नीतीश ने जननायक के दूसरी कार्यकाल की ओर इशारा करते हुए कह रहें थे, जो कि 24 जून, 1977 को राज्य का मुख्यमंत्री बने कर्पूरी ठाकुर को मजबूरन 21 अप्रैल, 1979 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

इसके आगे नीतीश कुमार ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों को जमीन पर उतारने के लिए हम प्रयत्नशील हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, लोकनायक जय प्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों से हमलोग प्रेरित होकर काम कर रहे हैं। हमलोगों ने न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर काम करते हुए हर इलाके और हर तबके का विकास किया है। हाशिए पर रह रहे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष पहल की गई। सीएम ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिससे समाज के हर तबके की महिलाएं जनप्रतिनिधि के तौर पर जनसेवाओं से जुड़ीं। अतिपिछड़ों को अनुसूचित जाति, जनजाति की तरह ही उद्योग लगाने, शिक्षा प्राप्त करने एवं अन्य कई क्षेत्रों में सुविधाएं दी जा रही हैं।

सीएम नीतीश ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ सत्ता का सुख पाना चाहते हैं, लेकिन हमारे लिए सत्ता का बस एक ही मतलब है लोगों का सेवा करना। लोगों की सेवा करना ही हमारा धर्म है और मैं वचन देता हूं कि जब तक मैं सत्ता में रहूंगा तब तक लोगों का सेवा करता रहूंगा। उन्होंने कहा कि हमनें जो भी नीतियां बनाईं उसका लाभ सबको मिला। सरकार में आने के पहले ही दिन से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समाज, अतिपिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं।

swatva

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