जनवेदना मार्च के बहाने क्या जाग गई बिहार कांग्रेस ?

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पटना : बिहार कांग्रेस के तरफ से देश और प्रदेश में बढ़ती महंगाई, आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, बैंकों में भ्रष्टाचार, पटना में जल-जमाव से हुई क्षति का राज्य सरकार सही आकलन करे, डिग्री लेकर मुझे पकौड़े नहीं बेचना है, जय शाह और किसानों की समस्या को लेकर बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के नेतृत्व में कांग्रेसी नेता जनवेदना मार्च सड़क पर उतरे। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या इस जनवेदना मार्च के सहारे बिहार में कांग्रेस की सांगठनिक पीड़ा हल हो पाएगी।

प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम से निकले इस प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। सरकार के खिलाफ मार्च कर रहे कार्यकर्ता हड़ताली मोड़ के पास बेकाबू हो गए। बेकाबू कार्यकर्ता को काबू में लाने के लिए पुलिस टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस को इसके लिए वाटर कैनन तथा डंडे का सहारा लेना पड़ा। लेकिन, कार्यकर्ता नहीं मानें तो पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

इस घटना के बाद बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि बिना वजह पटना में हमारे ऊपर लाठी चार्ज , वाटर केनन , आंसू गेस छोड़कर हमारे काफ़ी लोगों का हाथ-पाँव तोड़ा गया। यह कैसा लोकतंत्र है। गोहिल ने कहा कि ‘सावधान भारत ‘ के नारे के साथ वह सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने बड़ी उम्मीद के साथ बीजेपी को वोट दिया था। भाजपा के तरफ से खा गया था कि हर साल 2 करोड़ युवाओं को नौकरी देंगे। लेकिन, रोजगार देने में इस सरकार ने पिछले 40 साल का रिकार्ड तोड़ दिया। भारत दुनियां के 5 बड़े अर्थव्यवस्था वाले देश में शामिल था। लेकिन, आज भारत बेस्ट इकॉनमी वाले देशों की लिस्ट से बाहर हो गई है।

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