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प्रदेश अध्यक्ष बदलकर बंगला बचाने में जुटे चिराग, क्या होगा प्रिंस का ‘राज’!

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विधानसभा चुनाव में बिहार एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने के बाद लोजपा सुप्रीमो के समक्ष कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती है लोजपा को एकजुट रखने की। चुनाव परिणाम आने के बाद चिराग के नेतृत्व में सुरक्षित भविष्य नहीं देखने वाले नेता कांग्रेस व जदयू में जाना शुरू कर दिया है। कुछ दिनों पहले लोजपा के कुछ नाराज नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा तो 18 फरवरी को केशव सिंह के नेतृत्व में 60 से अधिक कार्यकर्त्ता जदयू में शामिल होने जा रहे हैं।

चुनाव परिणाम आने के बाद संगठन की नाराजगी को भांपते हुए चिराग ने दिसंबर में लोजपा की प्रदेश कार्यसमिति को भंगा कर दिया था। सभी प्रकोष्ठों को भंग करने के बाद यह कहा जा रहा है कि संगठन के अंदर नारजगी को कम करने के लिए चिराग ने ऐसा किया है। लेकिन, ढाई महीने बीतने के बाद अभी तक बात बनती नहीं दिख रही है।

चर्चाओं की मानें तो लोजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष परिवार के बाहर के लोगों को बनाना चाहती है। चिराग प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भूमिहार,राजपूत या कुशवाहा चेहरे की तलाश में हैं। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष चिराग के भाई प्रिंस राज हैं, जो समस्तीपुर से सांसद हैं। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी इसलिए हो रही है, क्योंकि प्रिंस राज को कोई अन्य जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जा रहा है।

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ज्ञातव्य हो कि बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा का सबसे शानदार प्रदर्शन 2005 में रहा, जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बिहार सरकार के मंत्री सुमित सिंह के पिता नरेन्द्र सिंह थे। नरेंद्र सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहते, उस चुनाव में लोजपा के 29 विधायक जीते थे। लेकिन, राज्य में कोई सरकार नहीं बनते देख नरेन्द्र सिंह लोजपा के कई विधायकों के साथ जदयू में शामिल हो गए थे।

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