सतर्कता से सुरक्षा

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याद कीजिए कि जब पिछले वर्ष हमारा देश कोरोना की लहर झेलने के बाद धीरे-धीरे अनलॉक हो रहा था, ठीक उसी समय यूरोप के देशों में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की धमक मिलने लगी थी और उसके अनुसार उन देशों ने टीकाकरण करने दोबारा लॉकडाउन लगाने और कुछ-कुछ पाबंदियों को न्यू नॉर्मल के तहत स्वीकार करने की पहल की। यही कारण है कि पिछले साल जो तबाही इटली, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने देखी, वैसी इस बार वहां नहीं हुआ। लेकिन, हमारे यहां पिछली बार के मुकाबले इस बार कोरोना की मार और अधिक पड़ी।

आदतन भारतीयों का मस्तमौलापन ही उन्हें लापरवाह बनाता है। जैसे अनलाॅक होते ही हम मान बैठे कि कोरोना चला गया। प्रधानमंत्री द्वारा ’दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ वाली बारंबार दी गई नसीहत को हमने भुला दिया। हम इतनी जल्दी में थे कि न्यू नाॅर्मल को भी ओल्ड नाॅर्मल मानने लगे। इन हरकतों का परिणाम मार्च महीने से सामने आने लगा, जब कोरोना ने दोबारा लगातार दूसरी होली में जीवन को बदरंग करने की आहट देने लगा। अप्रैल के पहला सप्ताह गुजरते-गुजरते कई प्रांतीय सरकारों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदी के साथ-साथ सीमित लाॅकडाउन तक लगाने की पहल होने लगी।

केंद्र सरकार को पता है कि पिछली बार की तरह कड़ा लाॅकडाउन लगाया, तो कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन, पहले से ही वक्त के थपेड़े झेल रही अर्थव्यवस्था पर मार पड़ेगी। इससे निम्न मध्यमवर्ग व मजदूर वर्ग पर सर्वाधिक असर पड़ेगा। इसके अलावा रुदाली गैग पिछले साल की भांति अफवाह फैलाएगा कि लाॅकडाउन के कारण एक ही दिन में हजारों लोग भूख से मर गए। सरकार के लिए यह आगे कुआं पीछे खाई वाली बात होगी। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही सरकार को कोई फैसला लेना चाहिए और इससे भी महत्वपूर्ण बात की हमें इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा कि सब कुछ सरकार ही करेगी। जब तक समाज आगे नहीं आएगा, सरकार के लाख प्रयास करने पर भी संक्रमण नहीं थमेगा।

बहरहाल, अच्छी बात यह है कि विपक्ष के वितंडा के बावजूद देश में टीकाकरण की सफल शुरूआत हो चुकी है। आयुर्विज्ञान विशेषज्ञ मानते हैं कि 70 प्रतिशत से अधिक आबादी जब टीके से अच्छादित हो जाएगी, जब हर्ड इम्यूनिटी उत्पन्न होगा, जिससे कोरोना को मात देने में भारत को सफलता मिलेगी। लेकिन, 140 करोड़ की आबादी को टीका लगा पाना हिमालय जैसा बड़ा कार्य है। इसमें समय लगेगा। तब तक मिनी लाॅकडाउन से लेकर न्यू नाॅर्मल के अन्य उपायों पर भी अमल करना चाहिए।

swatva

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