कुलाधिपति बने मूकदर्शक, यूपी गैंग ने खोखला किया बिहार के विश्वविद्यालयों को

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पटना : हाल ही में मगध विवि के प्रति विजिलेंस ने सख्त रवैया अपनाते हुए कुलपति आवास पर छापा मारा था और पूर्णिया विवि से जवाब मांगा है। वहीं, सोमवार को मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुद्दुस ने तत्कालीन कुलपति प्रो० एसपी सिंह पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री व राज्यपाल को पत्र लिखा है। प्रो एसपी सिंह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। साथ ही वे पाटलिपुत्र विवि और आर्यभट्ट ज्ञान विवि के प्रभारी कुलपति हैं।

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प्रो० कुद्दुस ने दो मोबाइल नंबर जारी करते हुए कहा कि लखनऊ के अतुल श्रीवास्तव नामक व्यक्ति ने राजभवन के नाम पर फोन कर भुगतान करने का दबाव बनाया। साथ ही उत्तर पुस्तिका खरीद के टेंडर में कार्यकारी / प्रभारी कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप की भूमिका की जांच की भी मांग की है। वीसी ने अपने पत्र में लिखा है कि विश्वविद्यालयों में लूट का खेल चल रहा है। इस खेल में बड़ा गिरोह कार्य कर रहा है।

जो कॉपी पहले सात रुपये प्रति की दर से लखनऊ के बीके ट्रेड्स के यहां छपाई होती थी। वहीं, कार्यकारी कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने इसे बढ़ाकर 16 रुपये प्रति कॉपी कर दी। साथ ही एक लाख 60 हजार कॉपी का ऑर्डर भी दे दिया। जब कॉपी छप कर आई तो 28 लाख रुपये का बिल भेजा गया। परीक्षा के चलते मजबूरी में 22 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। हालांकि, जीएसएम मापदंड का पालन नहीं करने पर छह लाख रुपये का भुगतान रोक दिया गया। इसी शेष राशि के भुगतान के लिए कुलपति पर राजभवन के नाम पर अतुल श्रीवास्तव ने दबाव दिया।

वहीं, दूसरा मामला बिहार के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का है। जहां अभी तक विवि के भवन का निर्माण भी नहीं हो पाया है, लेकिन किताब और आलमीरा की खरीद के लिए 5 करोड़ की राशि खर्च कर दी गई है। इन किताबों को रखने के लिए आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में 50 लाख प्रति वर्ष किराया पर जगह लिया गया है। यह खरीद पूर्व कुलपति जीएस जायसवाल के आदेश पर हुआ था।

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पूरी विधायिका में यह चर्चा है कि राजभवन के कारण बिहार के विश्वविद्यालयों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, जो भी आरोप लग रहे हैं और सभी का संबंध उत्तर प्रदेश से है। इसी के साथ यह भी कहा जा रहा है कि चुनिंदा लोगों को कुलपति और प्रभारी कुलपति के पद पर बैठाया जा रहा है।

swatva

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