डॉ. आरएन सिंह ने बिहार का मान बढ़ाया : स्वामी केशवानंद

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अशिक्षा व गरीबी के कारण धर्मांतरण : डॉ. आरएन सिंह
भारत साधु समाज ने किया विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत
बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ प्रांगण में हुआ आयोजन

पटना : विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. आरएन सिंह का भारत साधु समाज की ओर से भव्य स्वागत किया गया। साधु समाज के कार्यकारी महामंत्री व बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ के कार्यकारी कुलपति स्वामी केशवानंद जी ने विद्यापीठ प्रांगण में बहुसंख्य साधुओं के साथ डॉ. सिंह का अभिनंदन किया। एक-दूसरे को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। पद्मश्री डॉ. सिंह ने कहा कि धर्मांतरण की मुख्य वजह अशिक्षा और गरीबी है। पहली बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि धर्मांतरण के विरुद्ध कानून बनना चाहिए। तथा मठ-मंदिरों का चढ़ावा सरकार के खाते में न जाए। कमेटी बनाकर उसी संस्था के रख-रखाव व सामाजिक आयोजनों में खर्च किया जाए। इस पर गंभीरता से चर्चा हुई। दोनों अंतर्जातीय विवाह का स्वागत है। लेकिन, स्वार्थ के लिए किए गए प्यार का प्रतिकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के सहयोग से पूरे साधु समाज को विश्व हिंदू परिषद से जोड़ना है। यहाँ विविधता में एकता है। इंग्लैंड के लिवरपूल में पढ़ाई के दौरान ही हिंदू कल्चरल प्रोग्राम किया। मैं पहले इंसान हूँ, तब डॉक्टर।

डॉ. आरएन सिंह का अभिनंदन करते स्वामी केशवानंद जी

स्वामी केशवानंद जी ने कहा कि डॉ. आरएन सिंह बिहार के गौरव हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूरे प्रदेश का मान बढ़ा है। धर्मांतरण वैश्विक समस्या है। इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। जगह-जगह प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यमों से गरीबी दूर करने का प्रयास होना चाहिए। साधु समाज इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगा। मठ-मंदिरो के सहयोग से इसे मूर्त रूप देने में आसानी होगी। भारत साधु समाज के प्रदेश महामंत्री विश्वमोहन दास ने पातेपुर मठ में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष को कार्यक्रम का न्योता दिया। इस मौके पर कोनहारा घाट के चमचम दास, विद्याकुंड के नारायण दास, शेखपुरा मठ के पद्मनाभ दास, संत स्वामी रामविन्देश्वर दास, महंत महेंद्र दास, महंत नरहरी दास, महंत उमाशंकर दास, बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ के जनसंपर्क अधिकारी राम बिनोद कुमार प्रसाद व बजरंग दल के अभिषेक समेत बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ आश्रम परिवार के सैकड़ों सदस्य उपस्थित थे।

swatva

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