SC का ‘अमृत फैसला’, जीत हार के चश्मे से न देखें : भागवत

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mohan bhagwat

नयी दिल्ली : अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतिक्षित फैसला आने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान आया है। संघ प्रमुख ने शनिवार की दोपहर नयी दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देशवासियों से भाईचारा बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि इस फैसले को जय और पराजय की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

भाईचारा बनाए रखें देशवासी

श्री मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब हम सभी भारतवासी मिलकर राम मंदिर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस देश की जनभावना, आस्था एवं श्रद्धा को न्याय देने वाले निर्णय का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वागत करता है। दशकों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह विधिसम्मत अंतिम निर्णय हुआ है। इस लंबी प्रक्रिया में श्री रामजन्मभूमि से संबंधित सभी पहलुओं पर अदालत ने बारीकी से विचार किया है।

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संघ ने सभी को दिया धन्यवाद

श्री भागवत ने कहा कि कोर्ट ने सभी पक्षों द्वारा रखे तर्कों का मूल्यांकन किया। धैर्यपूर्वक इस दीर्घ मंथन को चलाकर सत्य व न्याय को उजागर करने वाले सभी न्यायमूर्ति तथा सभी पक्षों के अधिवक्ताओं का हम शतशः धन्यवाद व अभिनंदन करते हैं। इस लम्बे प्रयास में अनेक प्रकार से योगदान देने वाले सभी सहयोगियों व बलिदानियों का हम कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करते हैं।

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जय-पराजय की दृष्टि से नहीं देखना चाहिये

श्री भागवत ने कहा कि इस निर्णय को जय-पराजय की दृष्टि से नहीं देखना चाहिये। सत्य व न्याय के मंथन से प्राप्त निष्कर्ष को भारत वर्ष के संपूर्ण समाज की एकात्मता व बंधुता के परिपोषण करने वाले निर्णय के रूप में देखना व उपयोग में लाना चाहिये। सम्पूर्ण देशवासियों से अनुरोध है कि विधि और संविधान की मर्यादा में रहकर संयमित व सात्विक रीति से अपने आनंद को व्यक्त करें।

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इस विवाद के समापन की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप परस्पर विवाद को समाप्त करने वाली पहल सरकार की ओर से शीघ्रतापूर्वक होगी, ऐसा हमें विश्वास है। संघ प्रमुख ने कहा कि अतीत की सभी बातों को भुलाकर हम सभी श्री रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण में साथ मिल-जुल कर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करें।

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