भारत के बिजली घरों में कोयले की भारी कमी, पॉवर कट और महंगे बिल को रहें तैयार

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नयी दिल्ली : भारत में गंभीर बिजली संकट के हालात बन गए हैं। पॉवर कट और महंगे बिजली बिल, दोनों का करंट हमें लगने वाला है। इसका कारण यह है कि देश में भारी कोयला संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका असर यह हुआ कि देश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का 70 फीसदी उत्पादन करने वाले ताप विजली घरों में कोयले की भारी कमी हो गई है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक, 6 अक्टूबर को कोयले से बिजली बनाने वाले 72 प्लांट्स में कोयला स्टॉक समाप्त हो गया है।

70 फीसदी बिजली घरों के उत्पादन पर असर

जानकारी के अनुसार इन ताप बिजली घरों से 386.88 गीगावाट का उत्पादन होता है, यानी कुल बिजली उत्पादन का आधे से ज्यादा। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोल इंडिया लिमिटेड ने कहा है कि वह इस संकट को टालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना लॉकडाउन खुलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कीमतें बढ़ी हैं और स्थानीय कोयले की मांग में इजाफा हुआ है। अर्थव्यवस्था के गति पकड़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ी जिससे कोयले की मांग में भी इजाफा हुआ। इधर झारखंड, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल जैसे कोयला उत्पादक इलाकों में ज्यादा बारिश के चलते उत्पादन में काफी मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा चीन में बिजली संकट के चलते भी कोयला ईंधन की विश्व भर में मांग में इजाफा हुआ है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इसबीच कोल इंडिया सूत्रों के अनुसार भारत में अचानक कोयला संकट के लिए थर्मल पावर प्लांट भी जिम्मेदार हैं। संकट के बारे में संबंधित अधिकारियों को ससमय बताया गया था, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। कोल इंडिया ने कहा है कि ‘अगर बिजली के उपयोग को मेंटेन किया गया होता तो कोयला स्टॉक की स्थिति को संभाला जा सकता था। अब कोल इंडिया ने पावर प्लांट्स को कोयला सप्लाई बढ़ाकर 1.4 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया है और इसे 1.6 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने की कोशिश की जा रही है।

swatva

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