बे-बस मजदूरों को क्यों ठग रही कांग्रेस? बस देने की फिक्र और डबल किराया वसूली भी

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नयी दिल्ली : बस की राजनीति के चक्कर में कांग्रेस बुरी फंस गई है। बे—बस प्रवासी मजदूरों के बीच उनके लिए पार्टी द्वारा बस चलाने की हड़बड़ी दिखाने का दांव कांग्रेस पर भारी पड़ गया। ऐसा तब हुआ जब राज्स्थान की कांग्रेस सरकार ने मजदूरों और छात्रों को अपने राज्य से यूपी भेजने के लिए योगी सरकार को राजस्थान परिवहन विभाग से करीब साढ़े 36 लाख रुपए का अतिरिक्त बिल थमा दिया। 70 बसों से यूपी पहुंचाये गए छात्रों—मजदूरों के किराये के तौर पर राजस्थान सरकार द्वारा योगी सरकार से यह रुपए मांगे गए हैं। यह बिल पूर्व में इस मद में चुकाये बिल के अतिरिक्त है, यानी मजदूरों—छात्रों से डबल किराया वसूली।

राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने यूपी को थमाया मजदूरों का बिल

ऐसे में भाजपा समेत तमाम अन्य दलों ने मजदूरों के नाम पर कांग्रेस के ढोंग की पोल खोलते हुए कहा कि एक तरफ तो कांग्रेस और उसकी नेता प्रियंका गांधी मजदूरों के बीच चेहरा चमकाने के लिए बसें चलवाने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की राजस्थान सरकार मजदूरों से डबल किराया वसूलने के लिए बिल यूपी सरकार के पास भेज रही है। अब कहां गई उनकी राहुल और प्रियंका गांधी की मजदूरों के साथ सहानुभूति और दरियादीली की बातें। सब केवल कांग्रेस का ढोंग है जो वह आजादी के बाद से करती आई है।

भाजपा और मायावती हुए गरम, जमकर सुनाई खरी-खोटी

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इसे लेकर कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई है। मायावती ने इस संबंध में ट्वीट किया-‘राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवक-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपये और देने की जो मांग की गई है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है’।

उन्होंने लिखा कि राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है। वहीं दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात कर रही है। ऐसा करके कांग्रेस जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय है?

swatva

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