08 मई : सारण की मुख्य खबरें

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रामचंद्र देवरे ने ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए महेंद्र कुमार सिंह को भेजा पत्र

छपरा : वैश्विक कोरोना महामारी के दौर में ऑक्सीजन की किल्लत के बीच एक अच्छी खबर है। सारण के जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे ने सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए बिहार ग्रिड कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार सिंह को पत्र भेजा है।

जारी पत्र में जिलाधिकारी ने कहा है कि ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किये जाने के लिए सदर अस्पताल परिसर में पर्याप्त जमीन की उपलब्धता होने के बावजूद प्लांट के नहीं रहने के कारण मरीजों के उचित ईलाज के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में काफी असुविधा होती है।

इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने अनुरोध किया है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के मद्देनजर सदर अस्पताल छपरा में 30Nm3/HR @90-92% purity पीएसए टेक्नोलॉजी बेस्ड ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने करने के लिए आपकी कंपनी द्वारा सीआरएस के अंतर्गत संकलित प्रायफलन के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करने की कृपा की जाय। ताकि कोरोना संक्रमित सहित अन्य मरीजों के ईलाज में सहूलियत हो सके। ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमानित लागत 57.12 लाख रूपये है।

जिले में है कोरोना के 4000 से अधिक मरीज :

जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे ने कहा कि सारण जिले में वर्तमान में लगभग 4000 से अधिक कोरोना से संक्रमित मरीज है। जिसमें सदर अस्पताल के कोविड केयर सेन्टर में अभी कोरोना से संक्रमित 82 मरीज भरती है तथा पूरे अप्रैल माह में लगभग 200 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज सदर अस्पताल में भर्ती किये गये थे। इसके साथ ही सामान्य तौर पर भी सदर अस्पताल के इमरजेन्सी वार्ड में लगभग 25-30 मरीज, एसएनसीयू में 12 बजे तथा आईसीयू में 06 मरीज बराबर ऑक्सीजन पर रहते हैं। इस तरह सदर अस्पताल में लगभग 150 ऐसे मरीज रहते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता रहती है।

प्लांट लगने से ऑक्सीजन की समस्या होगी दूर :

जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे ने बताया कि बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के सहयोग से जिले में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की जायेगी। इस ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता लगभग 1000 एलपीएम होगी। पीएसए का मतलब प्रेशर स्विंग अब्सॉर्प्शन ऑक्सीजन प्लांट है। सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लग जाने के बाद हद तक समस्या दूर हो जाएगी। सदर अस्पताल सहित अन्य जगह चल रहे कोविड केयर सेंटर को भी यहां से ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी दूर होने के बाद कोरोना मरीजों को अन्य जगहों के लिए रेफर करने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।

कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में कई दंपत्तियों ने गबाई जान, कई बच्चे हुए अनाथ

छपरा : कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में कई दंपत्तियों को अपनी जान गवानी पड़ी है। ऎसे में उनके पीछे उनके बच्चों की देखभाल करने वाला कोई शेष नहीं बचा है। इस महामारी में किसी ने अपने माँ-पिता में से किसी एक को खोया है तो किसी ने दोनों को। इस महामारी ने कितने बच्चे को अनाथ किया है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा तो सामने नहीं आया है।

लेकिन ऐसे बच्चों को आज आगे बढ़कर मदद करने की दरकार है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के निदेशक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सक्षम योजना) राज कुमार ने सभी जिले के जिला पदाधिकारियों को कोविड महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर आदेश जारी किया है। जिन बच्चों ने कोविड-19 की वजह से अपने परिवार का सपोर्ट खो दिया है या कोविड-19 के चलते उनके मां- बाप की जान चली गई है उन्हें अब किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत देखभाल और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं को सुरक्षित रखने को समाज कल्याण विभाग ने गंभीरता दिखाई है

कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उपजी परिस्थितियों तथा कोरोना संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने तथा समाज में सबसे वंचित समूहों यथा -बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं को सुरक्षित रखने के लिए समाज कल्याण विभाग ने गंभीरता दिखाई है। इसको लेकर समाज कल्याण विभाग के निदेशक – सह – मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी राज कुमार ने सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों को अनुरोध पत्र जारी किया है, जिसमें वंचित समूहों को जिला स्तर पर पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है।

बच्चों को चाइल्ड ट्रैफिकिंग में जाने से रोकने एवं इसके नियमित अनुश्रवण के निर्देश :

जारी पत्र में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की स्थिति में यदि कोई बच्चा अनाथ होता है तो प्रभावित बालक व बालिका को अविलंब चाइल्ड केयर होम में रखने के लिए जरूरी व्यवस्था किये जाने की भी बात कही गयी है। साथ ही कहा गया है इन परिस्थितियों में ऐसे अनाथ बच्चों को ट्रैफिकिंग में वृद्धि हो सकती है। अतः इसके नियमित अनुश्रवण की आवश्यकता पर भी बल देने के निर्देश दिए गए हैं। जारी पत्र में कहा गया है कि समाज में अभी वंचित समूह यथा – दिव्यांगों, वृद्धजनों तथा विधवाओं से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किए जाने की आवश्यकता है ताकि कोरोना महामारी की कठिन परिस्थिति में उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।

अनुमंडलों में संचालित बुनियाद केंद्रों का कोविड केयर सेंटर अथवा वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में होगा उपयोग :

जारी पत्र में कहा गया है कि समाज कल्याण विभाग के अधीन कार्यरत स्टेट सोसायटी फॉर अल्ट्रा पुअर एंड सोशल वेलफेयर के सक्षम योजना अंतर्गत राज्य के सभी 101 अनुमंडलों में संचालित बुनियाद केंद्र का कोविड केयर सेंटर अथवा वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। सभी जिले में संचालित मोबाइल थेरेपी एवं और आउटरीच वैन “संजीवनी सेवा” का उपयोग आउटरीच कार्य अथवा टीकाकरण के कार्य में यथासंभव करने की सलाह भी दी गयी है। वहीं कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु की परिस्थिति में लाभुक के परिवार को वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना का लाभ नियमानुसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पहचान पत्र न रखने वालों का टीकाकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी

छपरा : स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई पहचान पत्र न रखने वाले लोगों का टीकाकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक ऐसे लोगों को कोविन ऐप में पंजीकृत किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला शासन की होगी।

मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, एनपीआर कार्ड या पेंशन पेपर में से किसी एक पहचान पत्र का होना जरूरी है लेकिन अगर किसी के पास यह पहचान पत्र नहीं हैं तो उन्हें वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता। इसी के मद्देजनर मंत्रालय ने ऐसे लोगों का टीकाकरण कराने के लिए गाइलाइन जारी की है। इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे।

टास्क फोर्स को दी गयी जिम्मेदारी :

ऐसे लोगों को ढूंढने का काम जिले की टास्क फोर्स करेगी। वह अल्पसंख्यक विभाग, सामाजिक न्याय विभाग व समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है। इन लोगों का कोविन ऐप में पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिंग दर्ज कराया जाएगा। मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी। इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे जिसके बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

जिलास्तर पर नोडल अधिकारी होंगे नामित :

गाइडलाइन के मुताबिक जिले की टास्क फोर्स जिलास्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी जो अलग-अलग समूह के लोगों की पहचान के लिए फैसीलिटेटर नियुक्त करेगा। यह फैसीलिटेटर लाभार्थियों की पहचान करेगा। नोडल अधिकारी उपलब्ध डेटा के मुताबिक इन लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन सत्र का आयोजन कराएंगे।

लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए श्राद्ध कर्म के अवसर पर ऑर्केस्ट्रा का आयोजन, पुलिस को पीटा

छपरा : अमनौर थाना क्षेत्र के एक गांव में श्राद्ध कर्म के अवसर पर ऑर्केस्ट्रा का आयोजन किया गया था जहां स्थानीय लोगों के द्वारा सूचना दिए जाने पर पुलिस बल तथा सीओ ने लॉकडाउन के उल्लंघन को लेकर घटनास्थल पर पहुंचे जहां कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दी।

जिसमें कई पुलिसवाले घायल हो गए तथा पुलिस की गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया वही सूचना मिलने पर म्हारा डीएसपी ने घटनास्थल का दौरा किया और काफी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी को देख लोग भाग निकले वहीं मौके से ऑर्केस्ट्रा के सामान को जप्त कर लिया गया तथा अन्य 5 लोगों को भी हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई।

जहां प्राथमिकी में 25 लोगों को अभियुक्त बनाया गया तथा अन्य 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई वही गिरफ्तार किए गए लोगों में नगर थाना क्षेत्र से अवधेश राय तथा मसरख थाना क्षेत्र के विजेंद्र पंडित मंगेश पंडित रतन पंडित और रंजन पंडित बताया जा रहा है वहीं थानाध्यक्ष सुजीत कुमार ने गिरफ्तार 5 लोगों को जेल भेज दिया गया है जबकि अन्य की तलाश जारी है

swatva

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