प्रकाश प्रगटीकरण से भौतिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं : आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेई

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पटना : देश में प्रधानमंत्री के आह्वान पर हर कोई 5 अप्रैल यानी रविवार को रात्रि नौ बजे दीपक, मोमबत्ती आदि जलाकर रोशनी करने की तैयारी में लगा है। पूरा देश आज कोरोना वायरस के विरुद्ध लड़ाई में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एकजुट होकर सारे विश्व को यह संदेश देना चाहता है कि भारतवर्ष का प्रत्येक नागरिक कोरोना वायरस की समाप्ति के लिए कटिबद्ध है।

इस प्रकाश योजना के बारे में बात करते हुए आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेई बताते हैं कि प्रकाश प्रगटीकरण से भौतिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक तीनों ही लाभ प्राप्त होते हैं। इसीलिए तो भगवान बुद्ध ने “अप्प दीपो भव” का उद्घोष किया था।

पूर्वाग्रहों को छोड़कर इस प्रकाश-महायज्ञ में सम्मिलित होना चाहिए

इस संदर्भ में उन्होंने आगे कहा कि भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक दल, धर्म और पंथ के पूर्वाग्रहों को छोड़कर इस प्रकाश-महायज्ञ में सम्मिलित होना चाहिए। यह संपूर्ण मानवता के लिए किया गया आह्वान है। अपने घर में बल्ब, ट्यूबलाइट इत्यादि बंद कर दें। लेकिन, पंखे चलने दे, इससे पावर ग्रिड की निरंतरता बनी रहेगी।

9 मिनट में किन्हीं मंत्रों का 9 बार उच्चारण करें

अरुण दिवाकर नाथ कहते हैं कि यथासंभव मिट्टी के दीए में सरसों का तेल एवं कपूर डालकर बत्ती जलाएं, इससे पर्यावरण के शुद्धिकरण पर इसका प्रभाव अधिक अच्छा होगा। 9 मिनट में किन्हीं मंत्रों का मन में 9 बार उच्चारण करें। चाहे गायत्री मंत्र हो अथवा महामृत्युंजय मंत्र अथवा” ओम विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव यदभद्रं तन्नासुव” अथवा णमोकार मंत्र अथवा पवित्र कुरान की कोई आयत,पवित्र बाइबल की कोई प्रार्थना अथवा पवित्र गुरु ग्रंथ साहब का कोई शब्द जिसमें लोक कल्याण की भावना भरी हो।

हजारों वर्ष की भारतीय संस्कृति

देशवासियों की एकजुटता के साथी इस प्रकाश उत्सव के पीछे प्राचीन भारतीय संस्कृति के अंतर्गत अंतर्निहित कीटाणुओं , जीवाणुओं और विषाणुओं को नष्ट करने के दीप परंपरा का भी पालन किया जा रहा है, जिसको हम हजारों वर्ष से दीपावली के रूप में परंपरागत रूप से मनाते रहे हैं। इस समूहिक प्रार्थना और मंत्र उच्चारण के साथ प्रकाश का निः संदेह अलौकिक प्रभाव पड़ेगा। तथा ईश्वर सब शुभ करेगा।

swatva

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  1. It’s always a feeling of contentment when we read any article by Hon’ble Prof A.D.N. Bajpai.

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