‘यादव जनमानस’ पूछ रहा ऐश्वर्या का कसूर? बेचैन राजद से दूर हो रहे नेता

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पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव होने में अभी कुछ महीनों की देरी है लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी राजद से उसका एक बड़ा जनाधार—’यादव’ अभी से दूर होने लगा है। एक तो लालू की बहू ऐश्वर्या को राबड़ी आवास से खदेड़ने का मामला और दूसरे तेजस्वी यादव की कार्यप्रणाली, इन सबने मिलकर चुनावों से बहुत पहले ही राजद की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। जहां एक—एक कर राजद के कई प्रभावशाली ‘यादव’ नेता पार्टी से दूरी बनाने लगे हैं वहीं पार्टी को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक में ‘यादव जनमानस’ द्वारा ऐश्वर्या के कसूर के बाबत सवाल ने लालू परिवार को अवाक कर दिया है।

विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक चौंकाने वाले

नतीजा भी फीडबैक के अनुरूप ही सामने आने लगा। हाल ही में पांच विधान परिषद सदस्यों ने पार्टी छोड़ जेडीयू का दामन थाम लिया, जबकि रघुवंश सिंह जैसे दिग्गज नेता ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। आरजेडी छोड़ने वाले प्रभावशाली यादव नेताओं में दिलीप राय, विजेंद्र यादव शामिल हैं। इसके अलावा राघोपुर के प्रभावशाली यादव नेता और पूर्व विधायक भोला यादव भी बगावत की राह पर हैं। स्पष्ट है कि विधानसभा चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही राजद ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा है।

राघोपुर में भोला यादव की धमकी और ऐश्वर्या की इंट्री

हाल ही में पूर्व सीएम राबड़ी देवी के घर के बाहर राघोपुर से पूर्व विधायक भोला यादव ने अपने समर्थकों संग धरना दिया था। 1995 में भोला यादव ने अपनी सीट लालू प्रसाद यादव के लिए छोड़ दी थी, जिसके बाद लालू यादव राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। इसके बाद से इसी सीट से राबड़ी देवी भी चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की। इन दोनों के चुनाव की सारी जिम्मेदारी भोला यादव ने ही संभाली थी। फिलहाल लालू परिवार की इस पुश्तैनी सीट से खुद तेजस्वी यादव विधायक हैं। भोला यादव ने इस सीट के लिए अपने किये गए त्याग का जब एमएलसी कोटे में मुआवजा मांगा, तो उन्हें पार्टी ने टरका दिया। इसके बाद भोला यादव ने आगामी चुनाव में लालू कुनबे को खामियाजा भुगतने की धमकी दे रखी है। इसके लिए वे लालू की बहू ऐश्वर्या या उनके पिता चंद्रिका राय को इस सीट पर समर्थन दे सकते हैं।

राजद उपाध्यक्ष विजेंद्र यादव का आरजेडी को अलविदा

विजेंद्र यादव की भूमिका बिहार के भोजपुर इलाके में किंगमेकर के तौर पर रही है। पिछले 30 सालों से वो आरा और भोजपुर इलाके में आरजेडी के यादव चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। मौजूदा समय में आरजेडी उपाध्यक्ष पद पर रहने के बाद भी वे पार्टी से नाराज चल रहे थे। विजेंद्र कहते हैं कि अब आरजेडी में बुजुर्गों का सम्मान नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि लालू यादव अब वो लालू नहीं रहे जो वे 1990 से 2000 के बीच हुआ करते थे। लालू की बहू ऐश्वर्या के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से उनको राबड़ी आवास से बेघर किया गया, उससे सूबे का यादव जनमानस काफी आहत है। इस सबका हिसाब यादव समाज आगामी चुनाव में जरूर मांगेगा।

एक और यादव नेता दिलीप राय ने भी छोड़ा राजद

राजद छोड़ने वाले विधान पार्षद दिलीप राय बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर इलाके में पार्टी का बड़ा चेहरा रहे हैं। लेकिन तेजस्वी की कार्यप्रणाली से नाराज होकर दिलीप राय ने जदयू का दामन थाम लिया। दिलीप राय ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव पार्टी मनमाने तरीके से चला रहे हैं और जमीनी नेताओं की कोई राय नहीं ली जा रही है। दिलीप राय ने भी कहा कि राजद में सम्मान के साथ काम करने का माहौल नहीं रहा।

ऐश्वर्या के साथ नाइंसाफी से आक्रोश में यादव समीकरण

लालू की बहू ऐश्वर्या के साथ लालू पुत्र तेजप्रताप यादव के व्यवहार, तलाक प्रकरण और ऐश्वर्या को राबड़ी आवास से बाहर निकालने की घटना ने बिहार के ‘यादव जनमानस’ को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। राज्य में यादव मतदाता 15 फीसदी के करीब हैं और इन्हें आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है। लेकिन लालू के इस मूल वोटबैंक को लालू के ही पुत्र तेजप्रताप की कारगुजारियों ने अंदर तक आहत कर दिया। समाज आज यह सवाल पूछ रहा है कि इस सारे मामले में आखिर एक यादव की ही बेटी ऐश्वर्या का आखिर कसूर क्या है? आगामी विधानसभा चुनाव में इस प्रश्न का सामना तो लालू कुनबे को करना ही पड़ेगा। यदि इसका कोई वाजिब जवाब लालू फैमिली ढूंढ लेती है तो ठीक, वर्ना राजद को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

swatva

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