तो अब खाऐंगे ठेकुआ…चाभेंगे ऊख! छठी मईया हो गइली प्रसन्न

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पटना : उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना के महापर्व छठ का समापन हो गया। राजधानी पटना में बुधवार की सुबह गंगा नदी के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में लाखों महिला और पुरूष व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को नदियों और तालाबों में खड़ा होकर अर्घ्य अर्पित किया। बच्चों का उत्साह तो देखते ही बनता था। जैसे ही सुबह का अर्घ पड़ा, उन्होंने घाट पर ही ठेकुआ और ऊख का आनंद उठाना शुरू कर दिया। वहीं व्रतियों ने छठ पूजा के समापन पर खुश होकर कहा कि ‘छठी मईया प्रसन्न हो गइली, अब सब ओर से खुशहाली आई’।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 सर्कुलर रोड स्थित लोकआस्था के महापर्व छठ के अंतिम दिन आज अपने सरकारी आवास पर स्थित तालाब में पूरी सादगी एवं श्रद्धा के साथ उदयीमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित किया तथा ईश्वर से राज्य एवं देशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिये प्रार्थना की।

देव सूर्य मंदिर में आस्था का सैलाब

औरंगाबाद जिले के देव स्थित त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में भी लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की और व्रतियों ने सूर्य कुण्ड में अर्घ्य अर्पित किया। इस अवसर पर अत्यन्त आकर्षक ढंग से सजाये गये देव के त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में आज सुबह से ही भगवान भास्कर के दर्शन के लिए व्रतियों तथा श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई थी। इस दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आये लाखों श्रद्धालुओं और व्रतियों द्वारा गाये जा रहे कर्णप्रिय छठी मईया के गीतों से पूरा
वातावरण गुंजायमान हो गया।
लोक मान्यता है कि देव में पवित्र सूर्य कुण्ड में स्नान कर भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने और त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में भगवान के दर्शन करने से मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होती है।
दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निराहार व्रत समाप्त हुआ और उसके बाद ही व्रतियों ने अन्न ग्रहण किया। चार दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन कल व्रतियों ने नदियों और तालाबों में अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया था।

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