शिक्षा का उद्देश्यपूर्ण और व्यावहारिक होना जरूरी : अतुल कोठारी

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पटना : शिक्षा का एक उद्देश्य होना जरूरी है। समाज के लिए, मानवता के लिए हमारा कुछ दायित्व होना चाहिए। “एजुकेशन फ़ॉर लिविंग एंड लाइफ” का होना बहुत जरूरी है। उक्त बातें शिक्षाविद अतुल कोठारी ने कॉलेज ऑफ कॉमर्स में इंदुशेखर झा की स्मृति में आयोजित व्याख्यान के दौरान कही।

कॉमर्स कॉलेज में इंदुशेखर झा व्याख्यानमाला

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कार्यक्रम में व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अच्छा चरित्र सबको देखना अच्छा लगता है, पर अपना चरित्र बनाने की कोशिश कोई नहीं करता। व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण की प्रक्रिया बचपन से ही शुरू होती है और लंबे समय तक वही प्रक्रिया दोहराने से चरित्र का निर्माण हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि चरित्र निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी बातें नहीं, दिनभर के जीवन में अपनाई जाने वाली छोटी बातें ही कारक की भूमिका निभाती हैं। उन्होंने शरीर और मन के विकास के लिए खेल को जरूरी तत्व बताते हुए कहा कि खेल से स्वास्थ्य शरीर और मन भी स्वस्थ रहता है। स्वच्छता पर बात करते हुए श्री अतुल कोठारी ने कहा कि बेंच पर बैठते हुए हम स्वच्छ जगह की तलाश तो करते हैं, पर बेंच से उठते समय करने लगें तो स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हमारे अंदर वैज्ञानिक सोच का न होना हमारी गलती नहीं, बल्कि यह हमारी शिक्षा व्यवस्था की खामी है।

वीसी पाटलिपुत्र विवि

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति गुलाबचंद राम जायसवाल ने कार्यक्रम में अध्यक्षीय वक्तव्य रखते हुए कहा कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया संस्कार से शुरू होती है। उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण एक स्थायी प्रक्रिया है जबकि व्यक्तित्व का विकास एक सतत प्रयास और प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि देश में 3 व्यक्तित्व महान माने जाते हैं। महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी और महामना मदन मोहन मालवीय। इन तीनों में ही चरित्र शक्ति का अदभुत तेज रहा था।

प्राचार्य तपन कुमार शांडिल्य

कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्राचार्य तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि मनुष्य जन्म लेता है तो उसके व्यक्तित्व विकास पर माता-पिता के संस्कार का प्रभाव पड़ता है। आगे चलकर युवा को और सशक्त बनाने की जिम्मेदारी शैक्षणिक संस्थान की होती है। उन्होंने कहा कि कॉलेज ऑफ कॉमर्स महाविद्यालय की स्थापना करने वाले इंदुशेखर झा के नाम पर एक व्याख्यान की शुरुआत पिछले ही वर्ष से शुरू की गई है। इस कार्यक्रम में वक्ता अतुल कोठारी के अलावा कुलपति गुलाबचंद राम जायसवाल, विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रो विजय कांत दस, कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्राचार्य तपन कुमार शांडिल्य और अन्य शिक्षक-शिक्षिका और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
सत्यम दुबे

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