गर्भवती होने के कारण दारोगा बनने से वंचित अभ्यर्थियों को कोर्ट से राहत

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गर्भवती होने के कारण दारोगा बनने से वंचित रह गईं महिला अभ्यर्थियों को बड़ी रहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में गर्भावस्था के कारण बिहार पुलिस की चयन प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट में शामिल नहीं हो सकी महिलाओं की याचिका निष्पादित करते हुए बिहार पुलिस अधिनस्थ सेवा आयोग को आदेश दिया है कि वह इन महिलाओं के लिए नए सिरे से टेस्ट कराये।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने बीपीएसएससी से उस वक्त गर्भवती रही महिलाओं के लिए दोबारा फिजिकल टेस्ट कराने को कहा है और उन्हें इस वर्ष अधिसूचित रिक्तियों में समायोजित करने का आदेश जारी किया है।

मालूम हो कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर खुशबू शर्मा नामक अभ्यर्थी ने एक याचिका दायर की थी। खुशबू ने अपनी याचिका में पटना उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को चुनौती दी थी। पटना उच्च न्यायालय की पीठ ने उच्च न्यायालय के एकल जज के आदेश को पलट दिया था। दरअसल एकल जज ने खुशबू को राहत दी थी और आयोग को उसका फिजिकल एग्जाम दो माह बाद कराने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि हमारा मानना है कि ना केवल अपीलकर्ता बल्कि जिन्होंने गर्भावस्था के कारण मोहलत मांगी, उन सभी को शारीरिक परीक्षा के लिए दोबारा बुलाना चाहिए।

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