यूरिया को ले मारामारी, सुबह से शाम तक लाइन में रहने के बावजूद बैरंग लौट रहे किसान

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नवादा : जिले के धान उत्पादक किसानों को यूरिया खरीदने में मारामारी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार के लाइसेंसी उर्वरक बिक्रेताओं के पास यूरिया का स्टॉक समाप्त है। सिर्फ बिस्कोमान में बिहार शरीफ से एक हज़ार बैग इफको यूरिया आई है। जिसके वितरण में किसानों की भीड़ के कारण दो से तीन दिनों तक कतार में लगना पड़ रहा है। खाद की किल्लत के कारण किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। धान रोपनी के समय से ही क्षेत्र के किसान उर्वरक की किल्लत का सामना कर रहे हैं।

इस बाबत कृषि अधिकारी कहते हैं कि क्षेत्र के सभी पंचायतों में पैक्स की दुकानें हैं। जिसके अध्यक्ष को इफको यूरिया किसानों में वितरण के लिए दिया जाता है। परंतु वारिसलीगंज प्रखंड क्षेत्र के अपसढ़ पैक्स अध्यक्ष को छोड़ शेष 15 पंचायतो के पैक्स अध्यक्ष के द्वारा उर्वरक बिक्री का लाइसेंस ही नहीं लिया गया है। फलतः किसानों को यूरिया संकट के लिए अधिकारी के साथ ही किसान हितों की रक्षा के लिए निर्वाचित पैक्स अध्यक्ष भी बराबर के दोषी हैं।

बता दें वारिसलीगंज जिले में धान उत्पादन में अब्बल प्रखंड माना जाता है। इसमें सकरी नहर की अहम भूमिका होती है। फलतः प्रखंड को जिले में धान का  कटोरा के रूप में जाना जाता है। सर्वाधिक धान उपजाने वाले वारिसलीगंज में यूरिया की आवश्यकता भी अधिक होती है। बावजूद प्रखंड क्षेत्र को उर्वरक का कम आवंटन के कारण धान रोपनी के समय से ही उर्वरक की किल्लत से किसान परेशान हो रहे हैं। किसान उर्वरक खरीदने के लिए घर के कई  सदस्यों के साथ सुबह से लेकर शाम तक उर्वरक के जुगाड़ में बिस्कोमान के इर्दगिर्द एकत्रित देखा जाता है।

सरकारी आंकड़े तो महज 6700 हेक्टेयर धान आच्छादन बताता है लेकिन अनुमानित आठ हजार हेक्टेयर भूभाग में धान की फसल की रोपनी की जाती है। जिसकेेेे लिए क्षेत्र के किसानों को धान रोपनी से लेकर धान उपजाने तक करीब 50 हजार बैग यूरिया की आवश्यकता होती हैै। लेकिन धान रोपनी के समय से ही बिस्कोमान को बहुत कम खाद उपलब्ध कराई जा रही है। जिला कृषि कार्यालय ने खुदरा उर्वरक बिक्रेताओं को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर खाद बिक्री करने का निर्देश दिया है। जिस कारण उर्वरक खरीदने के लिए किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। वही पैक्स अध्यक्ष, अधिकारी और उर्वरक के अधिकृत विक्रेता चैन की नींद सो रहे हैं।

16 पैक्सोः में मात्र एक अपसढ़ पैक्स उर्वरक बेचने का लिया लाइसेंस :-

किसान के हितों की रक्षा करने के लिए प्रत्येक पंचायत में एक पैक्स अध्यक्ष जनता के द्वारा निर्वाचित हैं। जिन्हें किसानों के सामने उत्पन्न होने वाले हर समस्या के लिए आवाज उठाने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन प्रखंड क्षेत्र के 15 उदासीन पैक्स अध्यक्षों के द्वारा कृषि विभाग के द्वारा निर्गत उर्वरक बेचने का लाइसेंस नहीं लिया गया है।

लाइसेंस निर्गत करने में अधिकारियों की रही उदासीनता :-

क्षेत्र के कुछ पैक्स अध्यक्षों की माने तो शुरुआत में कुछ पैक्स अध्यक्षों द्वारा उर्वरक बिक्री का लाइसेंस लेने की कोशिश की गई थी। लेकिन एग्रीकल्चर से स्नातक डिग्री प्राप्त होने पर ही लाइसेंस देने की बात पैक्स अध्यक्षो को बताई गई थी। हालांकि कुछ दिन बाद ही जिलाधिकारी द्वारा एग्रीकल्चर पास होने की व्यवस्था को निरस्त कर पैक्स अध्यक्ष को उर्वरक लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। लेकिन तब  कोई भी पैक्स अध्यक्ष किसानों के लिए आवश्यक उर्वरक का लाइसेंस लेना जरूरी नहीं समझे। बताते हैं कि अधिकारी अगर चाहते तो पैक्स को लाइसेंस लेना जरूरी कर सकते थे। तब पैक्स अध्यक्षों के द्वारा लाइसेंस लिया जाता और किसानों में खाद को लेकर अफरा-तफरी कम होती।

कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी:-

इस बाबत जिला कृषि पदाधिकारी लक्ष्मण प्रसाद कहते हैं कि किसानो की आवश्यकता को देखते हुए 23 सितम्बर की शाम तक वारिसलीगंज में इफको यूरिया का रैक आ जायेगी। प्रखंड को तीन हज़ार बैग यूरिया आवंटित किया गया है। किसानों को सरकारी दर पर सुलभता पूर्वक यूरिया उपलब्ध हो इसके की कृषि कर्मियों को देख रेख का जिम्मा सौंपा गया है।

swatva

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