07 मई : मधुबनी की मुख्य खबरें

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लगभग सौ बीघा भूमि पर जबरण कब्जा, प्रशासन के विरुद्ध किसानों का फूटा गुस्सा

मधुबनी : पिछले सप्ताह से जारी है जमीन कब्जा का खेल, सौ बीघा से उपर हो चूका है कब्जा, दो पक्षों में तनाव का माहौल, प्रशासन बनीं मुखदर्शक, धारा 144 को भी नहीं मान रहे अतिक्रमणकारी, अतिक्रमित भूमि पर घर बना रहे असमाजिक तत्व। किसानों ने कहा अगर चौबीस घंटे में अतिक्रमण मुक्त नहीं हुआ तो हक के लिए मर मिटने को होंगे तैयार, प्रशासन की होगी सारी जवाबदेही, प्रशासन के विरुद्ध रोषपूर्ण प्रदर्शन किया पिड़ित किसान ने।

मामला मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के खिरहर थाना क्षेत्र के सोनई गांव में किसानों के भूमि का जबरन कब्जा का है, जिसमें मामला अब तुल पकड़ता जा रहा है, जिससे गांव में तनाव का माहौल बढता ही जा रहा है। करीब पांच दिनों से लगातार किसानों के दर्जनों एकड़ जमीन पर असमाजिक तत्वों के द्वारा कब्जा करने का सिलसिला जारी है, जिसको लेकर किसानों का भी अब गुस्सा फूटने लगा है। न्याय के इंतजार में थक चुके दर्जनों पिड़ित किसानों ने प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन के विरुद्ध रोषपूर्ण प्रदर्शन किया है।

दरअसल ग्रामीण मनीष झा, किशोरी शरण शुक्ल, राजेश्वर झा, संजय शर्मा, सीताराम शर्मा, श्याम नारायण शुक्ल, अवधेश झा, रजनीश झा, चंद्रमोहन झा, रमण कुमार, सुशील झा, प्रदीप झा, अनुग्रह झा, विजय झा, श्याम सुन्दर झा, वैधनाथ झा समेत दर्जनों किसानों का कहना है कि विगत पांच दिनों में दर्जनों एकड़ भूमि का कब्जा कर लिया गया है। इतना ही नहीं अतिक्रमणकारियों ने पेड़ पौधे भी काटना शुरु कर दी है।

इस समस्याओं को लेकर सीओ से लेकर जिला पदाधिकारी तक को शिकायत कर चूके है। सीओ और थानाध्यक्ष एक दिन आकर उनलोगों को चेतावनी भी दिया था। पुलिस के द्वारा धारा 107 एवं 144 का कार्रवाई करने के बावजूद अतिक्रमण जारी है, और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बनी हुई है। जिससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि पुलिस प्रशासन किसी प्रकार का अनहोनी घटना का इंतजार कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन कब जागेगी जब कोई घटना हो जाएगी तब, फिर इसका जिम्मेवार कौन होंगे? किसानों का कहना है कि गांव के ही चलितर कामत, मिथिलेश राम, राम आशिष राम, राम एकवाल राम, पलटु मुखिया, राम कृपाल राम आदि के द्वारा असमाजिक तत्वों को उकसाया जा रहा है। इन लोगों के द्वारा हमलोगों की जमीन कब्जा कराकर गांव में दंगा करवाने का साजिश किया जा रहा है। हमलोग कानून को मानते आ रहे है, लेकिन अब सब्र का बांध टूट रहा है। उन्होंने कहा कि यदि चौबीस घंटे के भीतर प्रशासन हमलोगों के भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराते है, तो हमलोग अपने जमीन पर जाकर अपने हक के लिए खूद मर मिटने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

एनीमिया के लक्षणों की नहीं करें अनदेखी, जिले में थैलेसीमिया के 12 मरीज

मधुबनी : थैलेसीमिया एक रक्त जनित रोग है, जो मानव शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन को कम करता है और हीमोग्लोबिन द्वारा ही पूरी शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन को पहुँचाने का काम होता है। हीमोग्लोबिन का कम स्तर शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी करता है| इससे ग्रसित व्यक्ति के शरीर में रक्ताल्पता या एनीमिया की शिकायत हो जाती है|

शरीर का पीलापन, थकावट एवं कमजोरी का एहसास होना इसके प्राथमिक लक्षण होते हैं| तुरंत उपचार ना होने पर थैलेसीमिया के मरीज के शरीर में खून के थक्के जमा होने लगते हैं| थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है| सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया थैलिसिमिया एक गंभीर रोग है जो वंशानुगत बीमारियों की सूची में शामिल है| इससे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है जो हीमोग्लोबिन के दोनों चेन (अल्फा और बीटा) के कम निर्माण होने के कारण होता है|

जिले में थैलेसीमिया के 12 मरीज :

अभी भारत में लगभग 1 लाख थैलेसीमिया मेजर के मरीज हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग 10000 थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे का जन्म होता है। अगर केवल बिहार की बात करें तो लगभग 2000 थैलिसीमिया मेजर से ग्रस्त मरीज हैं| वहीं ही मधुबनी जिले में थैलेसीमिया से ग्रस्त 12 मरीज हैं जो नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूज़न पर हैं। जिन्हें उचित समय पर उचित खून न मिलने एवं ब्लड ट्रांसफ्यूज़न से शरीर में होने वाले आयरन ओवरलोड से परेशानी रहती है और इस बीमारी के निदान के लिए होने वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के महंगे होने के कारण इसका लाभ नहीं ऊठा पाते हैं| इसलिए खून संबंधित किसी भी तरह की समस्या पति, पत्नी या रिश्तेदार में कहीं हो तो सावधानी के तौर पर शिशु जन्म के पहले थैलेसीमिया की जांच जरूर करायें।

लक्षण- थैलेसीमिया से ग्रसित शिशु या व्यक्ति में ये प्रारंभिक लक्षण नजर आते हैं-

• शरीर एवं आँखों का पीलापन
• पीलिया से ग्रसित होना
• स्वभाव में चिडचिडापन
• भूख न लगना
• थकावट एवं कमजोरी का महसूस होना

क्या है उपचार- बीटा थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को चेकअप के उपरांत उपचार किया जाता है| मरीज के शरीर में रक्ताल्पता के स्तर के अनुसार इलाज बताया जाता है और एनीमिया की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें खून चढ़ाने की सलाह दी जाती है| ज्यादा गंभीर स्थिति ना होने पर मरीज को दवा खाने की सलाह दी जाती है एवं अत्याधिक गंभीर स्थिति वाले मरीज को मज्जा प्रतिरोपण ( Bone Marrow Transplant ) की सलाह दी जाती है|

सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवृति मिश्रा बताती हैं बीटा थैलेसीमिया मूलतः अनुवांशिक होता है एवं पति- पत्नी को शिशु के बारे में सोचने के समय पूरा रक्त जांच करवाना चाहिए जिससे आने वाले समय में किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके| डा. मिश्रा बताती हैं अगर एनीमिया के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें व नजरअंदाज बिलकुल न करें| साथ ही अगर किसी गर्भवती स्त्री में मधुमेह के लक्षण हों तो उन्हें और सतर्कता बरतनी चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए|

सांस की समस्या से निजात पाने के लिए अपनाएं घरेलू उपाय, श्वसन की हर समस्या कोरोना नहीं, रहें सतर्क

मधुबनी : कोरोना संक्रमण के इस समय में लोगों को सांस की दिक्कत हो सकती है। खासकर संक्रमित मरीज़ों को यह समस्या होने की सम्भावना है। इसे लेकर तुरन्त चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही घरेलू उपाय भी कारगर साबित हो सकते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ विनय कुमार के अनुसार अदरक सांस की नली से संक्रमण को दूर करने में कारगर है। बताया एक शोध में खुलासा हुआ कि अदरक सांस की नली में बैक्टीरिया पैदा करने वाले आरएसवी वायरस से लड़ने में मदद करती है।

संक्रमण काल में लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। डॉ० विनय ने कहा सांस की समस्या होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है। इस प्रकार की समस्या आम भी हो सकती है। उनमें से एक ऐसी ही बीमारी है सांस फूलने की। मेडिकल टर्म में इस बीमारी को डिस्पानिया कहा जाता है। अगर सीढ़ियां चढ़ते या फिर दौड़ते हुए सांस फूलने लगती है। या फिर जरा-सा भी काम करने, भारी सामान उठाने से आपकी सांस फूल जाती है, तो इसको बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि, ऐसा खराब जीवन-शैली के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा मोटापे, एंजाइटी, अस्थमा, दिल की बीमारी, कैंसर, टीबी या फिर एनीमिया के कारण सांस फूलने की समस्या हो सकती है। बता दें, कोरोना का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर ही पड़ता है, ऐसे में कुछ लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। ऐसे में आप घरेलू उपायों के जरिए सांस फूलने की इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

गहरी सांस लें :

डॉ कुमार ने बताया जिन लोगों को सांस फूलने की दिक्कत है। इससे छुटकारा पाने के लिए पेट से गहरी सांस लें। इसके लिए लेटकर अपने दोनों हाथों को पेट पर रख लें। इसके बाद नाक से गहरी सांस लें और पेट को फुलाते हुए अपने फेफड़ों में हवा भरने की कोशिश करें। इसके बाद मुंह से सांस लें और फेंफड़ों की हवा को बाहर निकालें। इस प्रक्रिया को आप दस मिनट तक कर सकते हैं।

कॉफी का करें सेवन :

सांस फूलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए कॉफी काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैफीन सांस की नली में मौजूद मांशपेशियों को आराम देती है । ऐसे में सांस फूलने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी का सेवन कर सकते हैं।
अदरक है कारगर

अदरक सांस की नली से संक्रमण को दूर करने में कारगर है। एक शोध में खुलासा हुआ कि अदरक सांस की नली में बैक्टीरिया पैदा करने वाले आरएसवी वायरस से लड़ने में मदद करती है। इसके लिए आप अदरक का गर्म पानी में या फिर खाने में डालकर सेवन कर सकते हैं।

जीवन शैली (लाइफस्टाइल) में करें बदलाव:

डॉ विनय ने कहा सांस की समस्या का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करना भी होता है। ऐसे में आपको धूम्रपान के सेवन से बचना चाहिए। साथ ही नियमित तौर पर व्यायाम भी करना चाहिए।

कोरोना से करें बचाव :

कोरोना के इस दौर में सतर्कता ज़रूरी है। इससे बचाव के लिए कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन आवश्यक है। हमेशा मास्क पहनें । सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। अत्यधिक ज़रूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें । अफवाहों पर ध्यान न देकर किसी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। निकट के सरकारी अस्पतालों में करें संपर्क।

लोजपा जिलाध्यक्ष ने मिथिला रत्न डॉ० मोहन मिश्र के निधन पर जताया शोक, कहा अपूर्णीय क्षति मिथिला की हुई

मधुबनी : राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दरभंगा के सुविख्यात प्रसिद्ध चिकित्सक मिथिला रत्न पद्मश्री डॉ० मोहन मिश्रा जी के निधन से समस्त मिथिलांचल में शोक की लहर है। लोजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व विधान पार्षद प्रो० बिनोद कुमार सिंह ने पद्मश्री डॉ० मोहन मिश्र के पर शोक संवेदना प्रकट करते हुए बताया कि उनके निधन से व्यक्तिगत तौर पर काफी मर्माहत हूं।

चिकित्सा जगत में दिवंगत पुण्यात्मा डॉ० मोहन मिश्र की देशव्यापी ख्याति और उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अति विशिष्ट राजकीय सम्मान पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिससे सम्पूर्ण मिथिलांचल गौरवान्वित हुआ और उन्हें मिथिला रत्न की उपाधि प्रदान की गई। आज के मौजूदा कोरोना संकट काल में तब जबकि उनकी ज्यादा जरूरत थी, ऐसे समय में उनका निधन चिकित्सा जगत को मर्माहत करने वाला अपूरणीय क्षति है।

लोजपा जिला अध्यक्ष बचनू मंडल, आदित्य नंदन झा उर्फ अनुपम राजा, अजीत नाथ मिश्रा, सिद्धार्थ शंकर मेहता, प्रवीण झा, संतोष पासवान, राजेश पासवान, शिवजी पासवान, अरविन्द पूर्वे, डॉ० ए०पी० सिंह, प्रमोद प्रियदर्शी, मो० परवेज आलम, अब्दुल अल्लाम, मंगल झा सहित दर्जनों लोजपा नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

अस्पतालों को भी समय पर आक्सीजन की उपलब्धता नहीं हो पा रही : कांग्रेस

मधुबनी : जिला कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है, कि आज कोरोना महामारी के चपेट में सम्पूर्ण देश के साथ-साथ बिहार को भी बड़ी तेजी से अपने आगोश में ले लिया है। अब इससे अछूता मधुबनी जिला भी नहीं रह गया है, जहां लोगों को समुचित इलाज की भी व्यवस्था नहीं है और लोग मर रहें है। सरकारी बदइंतजामी का आलम यह है कि निजी अस्पतालों को भी समय पर आक्सीजन की उपलब्धता नहीं हो पा रही, जहां पीड़ित रोगी अपना खर्च से ही इलाज कराते हैं। सरकारी अस्पतालों का हालात से सभी परिचित है ही जहाँ किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

जिलाध्यक्ष प्रो० झा ने कहा है कि पिछले साल कोरोना काल में राज्य के सभी जिला स्तरीय अस्पतालों को जीवनरक्षक उपकरणों से सुसच्चित करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री जी ने राज्य के सभी विधायकों एवं विधान पार्षदों के सरकारी कोष से पचास-पचास लाख रुपये जो लगभग 150 करोड़ रुपये होते है लिए गए थे। लेकिन मधुबनी जिला में इन पैसों में से एक रुपया भी खर्च नही हुआ और न कोई व्यवस्था की गई यह तो सीधा सीधा मधुबनी जिला के साथ नाइंसाफी की गई।

प्रो० झा ने कहा की मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी विधायकों एवं विधान पार्षदों के कोटे से दो-दो करोड़ रुपये कोरोना से लड़ने के नाम से लेने का फैसला किया है, जो लगभग 600 करोड़ रुपये होते है। मुझे अंदेशा है कि कहीं फिर से इन पैसों का इस्तेमाल कहीं दूसरे मद न कर दें, और मधुबनी के लोगों के साथ नाइंसाफी हो।

प्रो झा ने मुख्यमंत्री से आग्रह क्या है कि सभी विधायकों एवं विधान पार्षदों को अपने अपने जिला के अंतर्गत सभी प्रखण्ड स्तरीय अस्पताल, अनुमंडलीय स्तरीय अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू वेड, वेंटिलेटर, एम्बुलेंस सहित अन्य जीवनरक्षक उपकरणों में ही अनुसंशित करने का फैसला ले और सभी माननीय को निर्देशित करें।अभी राज्य में लॉकडाउन है, युध्द स्तर पे इन उपकरणों की व्यवस्था सरकार अविलम्भ करें, जिससे कि कोरोना से सही ढंग लड़ा जा सके।

पहचान पत्र नहीं होने पर भी लगेगा कोविड का टीका, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन

मधुबनी : स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई पहचान पत्र न रखने वाले लोगों का टीकाकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक ऐसे लोगों को कोविन ऐप में पंजीकृत किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला शासन की होगी।

मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, एनपीआर कार्ड या पेंशन पेपर में से किसी एक पहचान पत्र का होना जरूरी है लेकिन अगर किसी के पास यह पहचान पत्र नहीं हैं तो उन्हें वैक्सीनेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता। इसी के मद्देजनर मंत्रालय ने ऐसे लोगों का टीकाकरण कराने के लिए गाइलाइन जारी की है। इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रह रहे मरीज शामिल होंगे।

ऐसे लोगों को ढूंढने का काम जिले की टास्क फोर्स करेगी। वह अल्पसंख्यक विभाग, सामाजिक न्याय विभाग व समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है। इन लोगों का कोविन ऐप में पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिंग दर्ज कराया जाएगा। मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी। इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे जिसके बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

गाइडलाइन के मुताबिक जिले की टास्क फोर्स जिलास्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी जो अलग-अलग समूह के लोगों की पहचान के लिए फैसीलिटेटर नियुक्त करेगा। यह फैसीलिटेटर लाभार्थियों की पहचान करेगा। नोडल अधिकारी उपलब्ध डेटा के मुताबिक इन लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन सत्र का आयोजन कराएंगे।

कोविड-19 से जुड़े दवाओ के दुकानों में स्टॉक की डीसीएलआर एवं औषधि निरीक्षक ने किया निरीक्षण

मधुबनी : जिला पदाधिकारी अमित कुमार के निर्देश के आलोक मे अनुमंडल स्तर पर गठित धावा दल के द्वारा कोबिड-19 संक्रमण से उत्पन्न परिस्थितियो के कारण औषधियों की कालाबाजारी नही हो एवं सही मूल्यो पर आमजनों को दवा उपलब्ध हो। इसके लिए डीसीएलआर राकेश कुमार एवं औषधि निरीक्षक राकेश कुमार की धावा टीम द्वारा दवा दुकानो का निरीक्षण किया जा रहा है।

कल मधुबनी नगर के पोस्ट ऑफिस रोड मे स्थित श्री राम मेडिकल हॉल का निरीक्षण किया गया एवं आज थाना मोड़ स्थित कुमार मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया गया। डीसीएलआर राकेश कुमार ने बताया की सरकार के द्वारा कोबिड-19 से संबंधित 22 दवाओ की सूची जारी की गई है, जिसकी उपलब्धता आसानी से सही मूल्यो मे उपलब्ध हो इसके लिए दवा दुकानदार को निर्देशित किया जा रहा है। और डॉक्टर के लिखित पुर्जा पर ही दवा देकर उसका विवरण दवा दुकानदार को रखना है, की हिदायत दी जा रही है।

जिला स्तर पर सभी पंचो अनुमंडल मे धावा दल का गठन किया गया है, जिसमे संबंधित भूमि उप समाहर्ता के साथ पुलिस अधिकारी एवं सहायक औषधि निरीक्षक शमिल है, जो अपनी रिपोर्ट वरीय पदाधिकारियों को सौंपेंगे। वही कुमार मेडिकल स्टोर्स के प्रोपराइटर ने बताया की सरकार द्वारा कोबिड-19संक्रमण से जुड़े दवाओ की जो सूची जारी की गई है। वह दवा मेरे यहाँ सही मूल्य पर उपलब्ध है, और डॉक्टर के द्वारा लिखित पुर्जा पर ही हम किसी को दवा देते है, जिसका विवरण भी हम रखते है।

प्रशासन को आते देख ही दुकानों का शटर को बंद कर इधर उधर भागे दुकानदार

मधुबनी : सीमांचल क्षेत्र जयनगर में लॉक डाउन के निर्देश और गाईड लाईन का पालन कराने को ले प्रशासन ने सख्ती अपनाई। इसी क्रम में गयारह बजते ही जयनगर की सड़कों पर जयनगर एसडीएम बेबी कुमारी के नेतृत्व में जयनगर बीडीओ चन्द्रकांता, जयनगर ईओ अमित कुमार, जयनगर थाना अध्यक्ष संजय कुमार समेत अन्य अधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों और जवानों के साथ बाजार का भ्रमण कर जायजा लिया गया।

इधर प्रशासन की आने की भनक लगते ही दुकानदार अपने दुकान का शटर बन्द कर ईधर उधर चलते बने। प्रशासन की टीम पैदल मार्च कर बाजार समेत गली मुहल्ले के दुकानों का निरक्षण कर जायजा ले रही थी, उसी दरम्यान कल ही मिरचाई पट्टी स्थित एक रेडीमेड दुकान के बाहर कुछ लोगों का चप्पल और जूते दिखे, एवं दुकान का शटर अंदर से बंद पाया। तब शक होने पर दुकान को प्रशासन ने सख्ती अपनाते हुए दुकान को खुलवाया दुकान के भीतर कुछ लोग कपड़े की खरीदारी करने को ले इकट्ठे पायें गये। तुरंत ही दुकानदार समेत दुकान के भीतर मौजूद लोगों को दुकान के बाहर निकाला गया। इसके पश्चात एसडीएम के नेतृत्व में उक्त रेडीमेड कपड़े की दुकान को बीडीओ चन्द्रकांता और टीम में शामिल प्रशासन के द्वारा सील कर दिया गया।

आज फिर एसडीएम बेबी कुमारी ने बताया कि आज सूचना मिल रही थी, कि बाजार में काफी भीड़ इकट्ठा हो रही हैं। लोगों और दुकानदारों के द्वारा सोशल डिस्टेंस और निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा हैं। तुरंत ही प्रशासन की टीम सड़कों पर उतरी और मुआयना किया गया। इसी दरम्यान एक कपड़े की दुकान ओर एक बर्तन की दुकान खुली पाई गई, जिनको अविलंब सील कर दिया गया।

जानकारी देते हुए जयनगर एसडीएम बेबी कुमारी ने बताया कि ये करवाई लॉक डाउन के पालन को लेकर की गई हैं। जो आनावशक दुकानें नहीं खुलनी हैं, वह नहीं खुले। लॉक डाउन के निर्देश व गाईड लाईन का पालन अवश्य करें जो ऐसा नहीं करेंगे उन सभी पर सख्ती करवाई की जायेगी यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। बेवजह घरो से बाहर न निकलें, भीड़ इकट्ठा न होने दे। बाजार में काफी भीड़ भाड़ दिखने को मिला।

हालांकि ईद पर्व और शादी-विवाह, लग्न को ले बाजार में खरीदारी करने को ग्राहकों और आम लोगों की काफी भीड़ रही। शहर के मेन रोड, किराना गली, स्टेशन रोड, पटना गद्दी रोड, भेलवा चौक, शहीद चौक समेत बाजार के दुकानदारों और ग्राहकों समेत अन्य लोगों के द्वारा सोशल डिस्टेंस का पालन तो दूर कई लोग मास्क का उपयोग भी करते नजर नहीं आये।

जो दुकानें नहीं खुलनी हैं उनमें कपडे, रेडीमेड, बर्तन, जूता-चप्पल समेत अन्य अनावश्यक दुकानों को भी दुकानदारों के खोल कर लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाते नजर आये। कुछ दुकानदार तो दुकान का आधा शटर उठा कर दुकान के भीतर ग्राहकों को इकट्ठा कर दुकान के बाहर से ताला लगा दिया जाता हैं। दुकानदार के द्वारा अपने दुकान के बाहर अपने कर्मियों और परिजनों को रखते हैं, जो प्रशासन की आने की भनक लगते ही दुकान का शटर को बंद कर दिया जाता हैं।

वहीं, लॉक डाउन की उलंघन होने की सूचना पा कर थाना अध्यक्ष संजय कुमार के नेतृत्व पुलिस पदाधिकारी अरविंद कुमार समेत अन्य पुलिस पदाधिकारियों व जवानों ने सख्ती अपनाई व मनचलों एव निर्देश का पालन नहीं करने वालों पर लाठियां भी चटकाई, जिससे भीड़ तीतर बितर हो गया। सड़क पर वाहनों के आवागमन पर वाहन चालकों को भी रोक कर निर्देश का पालन करने को कहा गया। लॉक डाउन के निर्देश व गाईड लाईन के पालन कराने को ले प्रशासन के द्वारा सख्ती अपनाने और दुकान सील करने पर हड़कम्प मच गया।

इस बाबत जयनगर थाना अध्यक्ष संजय कुमार ने बताया लॉक डाउन के उल्लंघन के आरोप में दुकानदार के विरुद्ध मामला दर्ज कर आगे की करवाई की जा रही हैं। लॉक डाउन का उलंघन करने के आरोप में कल से आज तक कुछ दुकान को प्रशासन ने सील किया है। आदेश की अवहेलना करने पर ऐसी करवाई जारी रहेगी।

सुमित कुमार की रिपोर्ट

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