सेवा और ​सर्विस में अंतर : रामदत्त चक्रधर

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मुंगेर : सेवाकार्य सबसे बड़ा धर्म है। अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करना और नई बातों को सीखना अभ्यास वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेवा का भाव हमारे अन्दर तीन प्रकार से आते हैं- दर्शन, श्रवण और अध्ययन से। जब हम किसी चीज को देखते हैं या किसी बातों को सुनते अथवा अध्ययन करते हैं तो हमारे अंदर सेवाभाव जागृत होता है। देश में ऐसे लाखों लोग हैं जो अपना सुख न देखकर समाज की सेवा कर रहें है। हर समय लोग सेवा प्राप्त करने वाले नहीं बल्कि सेवा देने वाले भी बने। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर ने क्षेत्रीय पूर्णकालिक व प्रवासी कार्यकर्ता आॅनलाइन वर्ग में उपस्थित कार्यकर्ताओं को जूम एप, यूट्यूब और फेसबुक के माध्यम से संबोधित करते हुए कही।
आगे उन्होंने कहा कि लोगों के अंदर दो भाव हैं- वेदना और संवेदना। घटना और दुर्घटना देखकर मन में वेदना उत्पन्न होती है लेकिन उन दुखों को दूर करना ही संवेदना है और ऐसा भाव सभी कार्यकर्ता के अंदर हो। कोरोना काल में कई लोगों को तिरस्कार और अपमानित भी होना पड़ा, फिर भी वे सेवा कार्य में लगे रहे। उन्होंने मानव के साथ पशु और पक्षियों की भी सेवा की। कभी-कभी सेवाकार्य में गलत अवधारणाएँ भी जुट जाती हैं। सेवा और सर्विस में अंतर होता है। सर्विस वह है जिसके बदले में कुछ पाने की इच्छा रहती है, लेकिन सेवा में न तो हमें कुछ पाने की इच्छा रहती है और न ही पद प्रतिष्ठा की। कोरोना काल में लोगों में भोजन की भी समस्या उत्पन्न हो गई। हमारे कार्यकर्ताओं ने भोजन के साथ अन्य सामग्री की भी व्यवस्था की।

इसके पूर्व वंदना सभा में भारत और चीन के बीच गलवान के हिंसक झड़प में शहीद वीर सपूतों के चित्र पर पुष्पार्चन और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

इस आॅनलाइन वर्ग का उद्घाटन सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर के वंदना कक्ष में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय सहमंत्री डा0 कमल किशोर सिन्हा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय शारीरिक प्रमुख मनोज कुमार, भारती शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सहसचिव प्रकाशचन्द्र जायसवाल, सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर के प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक, क्षेत्रीय बालिका शिक्षा संयोजिका कीर्ति रश्मि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम में बिहार एवं झारखण्ड के लगभग 50 से अधिक पूर्णकालिक व प्रवासी कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। इस कार्यक्रम का संचालन, मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं धन्यवाद ज्ञापन भारती शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सहसचिव प्रकाशचन्द्र जायसवाल के द्वारा किया गया।

(संतोष कुमार)

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