किसानों ने बनाया अभ्यारण्य, 300 तरह के प्रवासी पक्षियों का बसेरा

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कटिहार : आज पृथ्वी दिवस है। बिहार सरकार ने 2011 से पृथ्वी दिवस को अगस्त क्रांति दिवस के समरूप मनाने की परंपरा शुरू की। इसका असर 2019 में तब दिखना शुरू हो गया जब बिहार के कटिहार जिले से एक सुकून भरी खबर सामने आयी। यहां के मनिहारी ब्लाक में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल की। यहां के मौजा जंगला टाल इंग्लिश के निवासियों ने अपनी 143 एकड़ रैयती जमीन में बिहार का पहला सामुदायिक पक्षी अभ्यारण्य बना डाला है। इस सामुदायिक पक्षी अभ्यारण्य को लेकर डीएम ने एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा, जिसे मंजूरी दे दी गई है।

कटिहार में ग्रामीणों का सामुदायिक प्रयास

बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि ग्रामीणों की इस पहल से अब इस रैयती भूमि पर ईको टूरिज्म विकसित होगा तथा क्षेत्र का चौतरफा विकास भी होगा। देश-दुनिया से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां बसेरा बनाऐंगे और पर्यटक इनका दीदार करने यहां पधारोंगे।

गोगाबिल झील को बनाया पक्षियों का घर

कटिहार के मनिहारी ब्लाक में करीब 217 एकड़ में गोगाबिल नामक झील है। यह झील एक ओर गंगा तो दूसरी ओर महानंदा से घिरी है। यहां साल में चार से छह महीने तक खेतों में पानी भरा रहता है जिससे ग्रामीण एक ही फसल उपजा पाते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए गांववालों ने फैसला किया कि समूचे इलाके को अभ्यारण्य में बदला जाए।

किसानों ने खुद दी अपनी जमीन, नियम भी बनाए

ढाई सौ से अधिक लोगों ने अपनी जमीन गोगाबिल पक्षी अभ्यारण्य के लिए दे दी। अब यहां 300 से अधिक प्रजाति के देशी—विदेशी पक्षियों ने बसेरा बना लिया है। यहां 73 एकड़ सरकारी जमीन पर कंजर्वेशन रिजर्व और ग्रामीणों की 143 एकड़ भूमि पर गोगाबिल सामुदायिक पक्षी अभ्यारण्य विकसित हो चला है। इसमें ग्रामीणों का मालिकाना हक भी बना रहेगा और साथ ही यहां पर्यटन को बढ़ाव भी दिया जाएगा। अभ्यारण्य को लेकर ग्रामीणों ने कुछ नियम भी बनाए हैं जिनका पालन यहां के निवासियों और यहां आने वाले सभी लोगों पर लागू होगा। इसके तहत पक्षियों या यहां की वनस्पति को नुकसान पहुंचाने से मना करने वाले और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने वाले संकेतक लगाए जायेंगे।

swatva

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