IIIT भागलपुर के कोरोना डिटेक्शन साफ्टवेअर को अधिकृत करे केंद्र : अर्जित

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राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य भाजयुमो सह पूर्व प्रत्याशी भागलपुर विधानसभा अर्जित शाश्वत चौबे ने बतौर होस्ट केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, ट्रिपल आईटी के निदेशक प्रोफेसर अरविंद चौबे, आईसीएमआर-आरएमआरआई के निदेशक डॉ पी के दास, स्वास्थ्य विभाग भारत सरकार के तकनीकी सलाहकार आशीष वर्मा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एमओएस के परामर्शदाता अमर प्रसाद रेड्डी, एमओएस के एपीएस कल्पेश शर्मा एवं दोनों संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन मीटिंग आयोजित किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य ट्रिपल आईटी संस्थान भागलपुर में विशेष शोध कर शिक्षक डॉ संदीप राज द्वारा तैयार किया गया डिजिटल एक्स-रे, सिटी सकैन आधारित कोविड-19 डिटेक्शन सॉफ्टवेयर निर्माण के आयाम एवं भविष्य की संभावना तलाशना था।

अर्जित ने बताया कि वे पिछले एक सप्ताह से साफ्टवेअर तकनीक की उपलब्धि एवं शोधकर्ताओं के शोध में मदद पहुंचाने के दृष्टिकोण से आईसीएमआर के संस्थान आरएमआरआई पटना, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व ट्रिपल आईटी भागलपुर के बीच सेतु के रूप में कार्य कर रहा था। आज का वीसी बैठक प्रो अरविंद चौबे के आग्रह पर आयोजित किया गया था ताकि भविष्य की संभावनाओं पर कार्य किया जा सके। आज की परिचर्चा में आरएमआरआई निदेहक ने कई महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि उनलोगों ने सम्पूर्ण बिहार का 23995 कोरोना का जाँच अभी तक किया है एवं कहा कि न्यूमेटिक मरीजों के अलावा अन्य मरीजों का एक्स-रे के माध्यम से कोविड स्क्रीन करना कठिन होगा इसलिए शोध कार्य में भारत के विभिन्न क्षेत्र से कोरोना संक्रमित मरीजों का विवरण उपलब्ध कराकर उसपर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आरटीपीसीआर के अलावा कोविड का सही डिटेक्शन संभव नही है लेकिन साफ्टवेअर तकनीक से जाँच को नया आयाम दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि असिम्प्टोमैटिक मरीजों का डिटेक्शन साफ्टवेअर कर पा रहा है या नही। उन्होंने नए पैरामीटर्स बनाकर प्रोटोकॉल तैयार करने की बात कही है। प्रो अरविंद चौबे ने स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकारों एवं परामर्शदाताओं से डेटा एवं डिजिटल एक्स-रे उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने चल रहे शोध कार्य को सराहा एवं इसके विकास के लिए हर संभव मदद प्रदान करने की बात कही। उन्होंने अपने मंत्रालय के सलाहकारों को यथाशीघ्र देश के कोरोना संक्रमित मरीजों का डेटा उपलब्ध कराने को कहा एवं आयीसीएमआर नई दिल्ली और ऐम्स नई दिल्ली को भी इस शोध को समझकर क्रियान्वयन को गति देने की बात कही। साथ ही विभिन्न कोरोना एवं नन कोरोना मरीजों के डिजिटल एक्स-रे को स्टडी करके आंकलन करने का निर्देश दिया है और एरर को 5 प्रतिशत से कम करने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर काम करने पर भी जोर डाला है। मंत्रीजी के कहने पर आरएमआरआई इस शोध के लिए गाइड का कार्य करेगा। आरएमआरआई से डॉ कृष्णा पांडे, डॉ आशीष पाठक, डॉ मेजर मधुकर, डॉ जे एस लाल, डॉ शुभांकर सिंह, डॉ संजीव विमल एवं ट्रिपल आईटी से असिस्टेन्ट प्रफेसर ईसीई डॉ संदीप राज भी उपस्थित होकर तकनीकी राय दिया।

अर्जित ने कहा कि विगत 9 मई को ट्रिपल आईटी निदेशक प्रो अरविंद चौबे द्वारा उन्हें कोरोना डिटेक्शन सॉफ्टवेयर डेभलपमेंट के विषय में बताया गया था जिसके उपरान्त सम्पूर्ण तथ्यों को गंभीरता से समझने के लिए उसे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को पत्र भेजकर सूचित किया था। ट्रिपल आईटी के शिक्षक डॉ संदीप राज द्वारा तैयार किया गया साफ्टवेयर को अधिकृत करने हेतु 9 मई को ही पत्र भेजकर इसकी जानकारी दिया एवं आईसीएमआर के अंतर्गत कार्य कर रहे आरएमआरआई के निदेशक डॉ पी के दास से भी इस विषय पर चर्चा कर साफ्टवेयर की जांच कर संरक्षण प्रदान करते हुए इसे अधिकृत करने का आग्रह किया था। ज्ञात हो कि इस साफ्टवेअर के माध्यम से संदिग्ध मरीजों के डिजिटल एक्स-रे रिपोर्ट को देखकर 1 सेकंड में ही यह पता चल जाता है कि न्यूमेटिक मरीज कोरोना पॉजिटिव है या नही । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के हस्तक्षेप के उपरांत प्रो अरविंद चौबे द्वारा मायागंज अस्पताल में 20 एक्स-रे रिपोर्ट को 20 सेकेंड में देख कर यह सुनिश्चित किया कि कितने मरीज कोरोना संक्रमित हैं। अर्जित ने इस साफ्टवेअर तकनीक को और कारगर तरीके से जांच कर अधिकृत करने हेतु आरएमआरआयी के निदेशक डॉ पी के दास को पहल करने का आग्रह किया था। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे एवं भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय नोडल जांच केंद्र को इसकी जानकारी लेकर तुरंत क्रियान्वयन कराने का आग्रह किया था।

अर्जित ने कहा है कि इस तकनीक से समय और पैसा दोनों की बचत हो सकती है और लंबे जांच प्रक्रिया से बचा जा सकता है। अभी रैपिड किट द्वारा केवल स्क्रीनिंग का कार्य हो रहा है जिसके जांच उपरान्त आरटीपीसीआर उपकरण पर पुनः टेस्ट कर पॉजिटिव या निगेटिव केस का आंकलन किया जा रहा है। भागलपुर में आरटीपीसीआर नही रहने जे कारण सैम्पल टेस्टिंग के लिए पटना भेजना पड़ रहा है। अर्जित ने कहा कि इस साफ्टवेअर तकनीक के सफल होने पर हज़ारों करोड़ के जांच किट के खर्च को बचाया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारत सरकार को आज पत्र लिखकर ऐसे वैज्ञानिक रिसर्च को राष्ट्रहित में जल्द लागू करने का आग्रह किया है। उन्होंने आज ट्रिपल आईटी के निदेशक और शिक्षक को बधाई देते हुए कहा कि डिजिटल टेकनोलॉजी के लिए यह कार्य एक महान उपलब्धि के रूप में सार्थक सिद्ध होगा ऐसा विश्वास है।

swatva

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