कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर कांग्रेस ने NDA सरकार पर साधा निशाना, कहा- दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली

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पटना : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी रिसर्च विभाग के चेयरमैन एवं प्रदेश प्रवक्ता आनंद माधव ने मॉनसून सत्र के दौरान हुई चर्चा को आधार बनाकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन के पटल पर वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत कैग रिपोर्ट बिहार सरकार में फैले अव्यवस्था की पोल खोलता नज़र आता है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कई शंकाओं को व्यक्त किया है। उनमें सबसे महत्वपूर्ण है विभिन्न परियोजनाओं के राशि का 3880 उपयोगिता प्रमाण पत्रों को प्रस्तुत नहीं करना।

आनंद माधव ने कहा कि विदित हो कि बिहार सरकार द्वारा इन परियोजनाओं को 92,687 करोड़ प्रदान किया गया था, जिसका कोई लेखा जोखा अब तक नहीं दिया गया है। कैग ने साफ़ शब्दों में कहा है कि इस तरह उपयोगिता प्रमाण पत्र को नहीं देना आवंटित राशि के दुरुपयोग एवं धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ाता है।

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माधव ने स्पष्ट रूप से कहा कि इससे सरकार की मंशा का साफ़ पता चलता है। माधव ने यह भी बताया कि सरकार स्वयं को महिला सशक्तिकरण का पक्षधर बतलाती है पर विडंबना यह है कि जेंडर बजट में आवंटित 2932 करोड़ रूपया सरकार खर्च नहीं कर पाती। तो क्या सिर्फ़ सरकार काग़ज़ों पर महिला सशक्तिकरण का गीत गाती है? दूसरी ओर बाल कल्याण के मद में भी 2958 करोड़ रूपया भी अव्ययित रह जाता है। ये बात अलग है कि स्वयं नीतीश कुमार घूम घूम कर बिहार में कुपोषण के कारण बच्चों के ठिगने विकास पर दुख प्रकट करते रहे हैं।

कैग के रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 35 लोक उपक्रमों को 20145.84 करोड़ रूपया का बजटीय सहायता, घृणा, अनुदान एवं गारंटी प्रदान किया गया है। ये उपक्रम पिछले कई वर्षों से प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने खातों का अंतिम रूप नहीं दे रहे। कैग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ये उपक्रम अपनी ज़िम्मेवारी का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।

सच तो यह है कि ये डबल इंजन की सरकार ही अपनी ज़िम्मेवारी का निर्वहन करनें में सक्षम नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो कैग इस तरह की आशंकाओं को व्यक्त नहीं करता। कैग की रिपोर्ट यह बतलाती है कि दाल में काला नहीं वरन पूरी दाल ही काली है। विदित हो कि पटना उच्च न्यायालय ने भी फ़रवरी 2021 ने इस संदर्भ में सरकार को फटकार लगाई थी। सच्चाई तो यह है कि पूरी की पूरी सरकार का काम एडहॉक और इवेंट पर ही आधारित होता है, व्यवहारिक नहीं।

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