खबर फैलने के बाद कोरोना जांच मामले में 9 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई, 4 बर्खास्त

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एक दैनिक अंग्रेजी अखबार की स्टिंग रिपोर्ट में कोरोना टेस्टिंग को लेकर बिहार के कई जिले के कई PHC में धांधली का बड़ा खेल सामने आया है, जो शायद सरकार की नजर में काफी समय तक नहीं आया या फिर जिसे जानकर भी सरकार नजरअंदाज कर रही थी। जमुई, शेखपुरा और बरहट के PHC में कोरोना टेस्टिंग के आंकड़ों के साथ घपलेबाजी की बातें सामने आने के बाद सरकार एक्शन में आ गई है।

कोरोना जांच में गड़बड़ी पर कार्रवाई करते हुए बिहार सरकार ने 9 स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टर को सस्पेंड व बर्खास्त की है। इनमें से 4 सस्पेंड तथा 5 बर्खास्त किये गए हैं। जमुई के सिविल सर्जन डॉ विजेंद्र सत्यार्थी, जमुई के सिकंदरा प्रभारी चिकित्सक डॉ साजिद हुसैन, जमुई के बरहट चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एन के मंडल और जमुई जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को सस्पेंड किया गया है।

वहीं, जमुई जिला कार्यक्रम प्रबंधक, सिकंदरा प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, बरहट प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक तथा दोनों प्रखंड के चिन्हित एएनएम और लैब टेक्नीशियन को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

क्या है कथित मामला

तेजस्वी यादव व मनोज झा के मुताबिक़ अंग्रेजी भाषा के एक अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टिंग ऑपरेशन में इन गड़बड़ियों का खुलासा किया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बिहार के जमुई, शेखपुरा और बरहट के PHC में कोरोना टेस्टिंग के आंकड़ों के साथ घपलेबाजी की जा रही है। सरकार की तरफ से टेस्टिंग के आंकड़े बढ़ाए जाने के लिए फेक मोबाइल नंबर और फेक नामों का इस्तेमाल कर टेस्टिंग का डाटा तैयार किया जा रहा है।

फेक नंबर और फेक नाम पर तैयार की गई टेस्टिंग रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस ने तीनों ही जगहों पर तीन दिनों के डाटा को खंगाला। 16 जनवरी, 18 जनवरी और 25 जनवरी के आंकड़ों का जब जायजा लिया गया तो मालूम हुआ कि फेक नंबर और फेक नाम का इस्तेमाल कर के कोरोना टेस्टिंग की रिपोर्ट की जा रही है। जमुई, शेखपुरा और बरहट में इन तीन दिनों में तकरीबन 588 एंट्री की गई। जमुई के बरहट में 230 टेस्टिंग सैंपल्स का डाटा तैयार किया गया जबकि टेस्टिंग के लिए 12 का ही डाटा तैयार किया गया। सिकंदरा में 208 एंट्री में से 43 तो सदर के 150 एंट्री में से 65 का डाटा तैयार किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि टेस्टिंग के पहले जिस नाम और नंबर की एंट्री कराई जाती है, वो ही गलत निकली। फेक निकली। एक-एक नंबर पर कम से कम 12-12 एंट्रियां की गई और उसी नंबर की तर्ज पर 12 के रिपोर्ट तैयार कर लिए गए। यहां तक कि कोरोना टेस्टिंग किट को इस्तेमाल करने की जहमत भी नहीं उठाई गई।

नंबरों को ट्रेस करने पर उत्तर प्रदेश से मिलता है कनेक्शन

जिस नंबर का इस्तेमाल करके टेस्टिंग की गई, वह नंबर ही फेक है। जब उस नंबर की जांच पड़ताल की गई तो मालूम हुआ कि उसने कभी कोरोना टेस्टिंग ही नहीं कराई। इंडियन एक्सप्रेस ने इन नंबरों को ट्रेस करना शुरू किया तो मालूम हुआ कि कोई नंबर उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ का है तो कोई नंबर जमुई का न हो कर बांका का है।

कर्मचारियों ने कहा- हम पर टेस्टिंग बढ़ाने का दबाव है!

अब जब इंडियन एक्सप्रेस ने कर्मचारियों से बात करनी चाही तो उन्होंने साफ कहा कि हम पर दबाव होता है ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग करने का, हमें रोजना के टारगेट को पूरा करना होता है, लेकिन समस्या यह है कि लोग टेस्टिंग कराने के लिए आते ही नहीं हैं। दरअसल, टेस्टिंग के लिए वहीं लोग आते हैं जिनमें कोरोना के लक्षणों पता चलता है। यानी सिंपटोमिक मामले। वहीं, एसिंपटोमिक मामलों में टेस्टिंग के लिए न लोग जहमत उठाते हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी। ऐसे में रोजना के टारगेट को पूरा करने के लिए टेस्टिंग के रेडीमेड आंकड़े तो निकालने ही होंगे।

वहीं, इस मसले पर डिप्टी सीएम ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अमूमन नहीं होती है। लेकिन, अगर आई है तो देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्ष सिर्फ आरोप लगा सकता है, कभी विपक्ष सकारात्मक चीजों को वाहवाही नहीं दे सकता।

swatva

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