कैसे काम करती है पंचायत

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सांकेतिक तस्वीर

पंचायती राज अधिनियम के अनुसार मुखिया की जिम्मेदारियाँ निश्चित की गई हैं। उनमें पहला ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित करना और उनकी अध्यक्षता करना है। बैठकों का कार्य-व्यवहार संभालना और उनमें अनुशासन कायम रखने के लिए मुखिया ही जिम्मेदार है। एक कैलेण्डर वर्ष में ग्राम सभा की कम-से-कम चार बैठकें आयोजित करने की जिम्मेदारी नहीं निभने पर मुखिया के विश्रद्ध कार्रवाई सम्ीव है। मुखिया ही पंचायत का प्रमुख होता है इसलिए पंचायतकी पूँजी व कोष पर विषेष नजर रखना उसका कर्तव्य है।

ग्राम पंचायत के कार्यकारी प्रशासन के प्रमुख होने के कारण उसकी देख-रेख की जिम्मेदारी भी मुखिया की ही है। ग्राम पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों दिशा निर्देश देना और उन्हें नियंत्रण में रखना, ग्राम पंचायत की कार्ययोजनाओं और प्रस्तावों को लागू करना, नियमानुसार रखी गई विभिन्न रजिस्टरों के रख-रखाव का इंतजाम करना, ग्राम पंचायत द्वारा तय किए टैक्सों, चंदों और फीसों की वसूली का इंतजाम कराना, विभिन्न निर्माण कार्यों को कार्यान्वित करने का इंतजाम करना, और राज्य सरकार या एक्ट अथवा किसी अन्य कानून के अनुसार सौंपी गई अन्य जिम्मेदारियों और कार्यों को पूरा करना मुखिया की जिम्मेदारी होती है।

उप मुखिया की जिम्मेदारियाँ

मुखिया द्वारा समय-समय पर लिखित आदेश के रूप में सौंपे गए शक्तियों, कार्यों एवं कर्त्तव्यों का निर्वहन करेगा। साथ ही ग्राम पंचायत के सामान्य या विशेष प्रस्ताव द्वारा निदेशित कार्यों का निर्वहन करेगा। मुखिया की अनुपस्थिति में मुखिया द्वारा सम्पादित किए जा रहे सभी शक्तियों, कार्यों एवं कर्त्तसव्यो का अक्षरशः निष्पादन निर्वहन करेगा।

ग्राम पंचायत का स्टाफ

प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पंचायत सचिव की नियुक्ति सरकारी नियमानुसार सक्षम पदाधिकारी द्वारा किया जाएगा। पंचायत सचिव ग्राम पंचायत कार्यालय का प्रभारी होता है और उसके सभी कर्त्तव्यों का निष्पादन सरकारी निर्देशों के अनुसार तथा बिहार ग्राम पंचायत (सचिव की नियुक्ति, अधिकार एवं कर्तव्य) नियमावली, 2011 के तहत करना है। ग्राम पंचायत अपने कार्यों के संचालन के लिए भुगतान के आधार पर अवैतनिक कर्मचारियों या व्यवसायिकों की सेवा राज्य सरकार के निदेशानुसार ले सकती है।

ग्राम रक्षा दल का गठन

सामान्य पहरा, निगरानी एवं आकस्मिक घटनाओं जैसे अगलगी, बाढ़, बांध में दरार, महामारी, चोरी, डकैती आदि का सामना करने,सार्वजनिक शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने तथा सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपे गये कार्यों को सम्पादित करने हेतु विहित रीति से एक दलपति की नियुक्ति की जाएगी। एक दलपति के अधीन प्रत्येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत एक ‘‘ग्राम रक्षा दल’’ का गठन किया जाएगा। ग्राम रक्षा दल में ग्राम के 18 वर्ष से 30 वर्ष तक के शारीरिक रूप से सभी योग्य व्यक्ति सदस्य होंगे। ग्राम रक्षा दल के गठन,कर्तव्य एवं उपयोग के लिए सरकार नियम बनाएगी।

ग्राम पंचायत और ग्राम सभा में संबंध

ग्राम पंचायत के सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। अधिनियम के अंतर्गत सौंपे गए सभी 29 विषयों के कार्यों के अनुसार ग्राम सभा के प्रति मुखिया, उप मुखिया एवं ग्राम पंचायत सदस्य उत्तारदायी होते हैं। ग्राम सभा के निर्णय को ग्राम पंचायत की बैठक द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। मुखिया या ग्राम पंचायत के सदस्यों के कार्यकलाप के संबंध में ग्राम सभा की बैठक में उनसे प्रश्न पूछा जा सकता है। ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णयों एवं ग्राम पंचायत द्वारा निष्पादित कार्यों का विवरण ग्राम सभा में रखा जाता है। ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों के रचनात्मक सहयोग से ग्रामीण विकास एवं योजनाओं का सुगमता से कार्यान्वयन संभव है।

ग्राम पंचायत की संपत्ति और निधि

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 में पंचायतों को संपत्ति अर्जित करने, धारण करने तथा राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से उसका निबटान करने की शक्ति प्राप्त है। पंचायतों को विभिन्न स्रोतों से जो धन प्राप्त होता है उसे पंचायत निधि में जमा किया जाना है। पंचायत द्वारा किए जाने वाले कार्यों पर जो खर्च आता है, उसे इस निधि के प्रयोग से पूरा किया जाना है। इस संबंध में ऐसे नियम हैं जो पंचायत निधि से धन प्राप्त करने या धन निकालने की क्रियाविधि को नियंत्रित करते हैं। इन नियमों का कड़ाई से पालन करना बेहद जरूरी है।

ग्राम पंचायत द्वारा करारोपण

ग्राम पंचायत को कर लगाने की शक्ति अधिनियम के प्रावधानों के तहत है। इसके अंतर्गत होल्डिंग कर, सम्पति कर (सभी प्रकार की आवासीय और वाणिज्यिक सम्पतियों पर कर) व्यवसायों, व्यापारों आदि पर लगाए जानेवाले कर, जलकर, प्रकाश शुल्क तथा स्वच्छता शुल्क आदि सम्मिलित हैं।

पंचायतों को वित्तीय सहायता एवं अन्य साधन

बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अन्तर्गत गठित राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई अनुशंसा (जिसे सरकार ने स्वीकृत कर अधिसूचित कर दिया हो) के आधार पर प्रत्येक पंचायत को राज्य कोष से सहाय्य अनुदान प्राप्त करने का अधिकार है।

ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला परिषद अपने-अपने क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के अन्तर्गत अधिनियमानुसार सरकार द्वारा निर्दिष्ट अधिकतम दर के तहत करध्शुल्क लगा सकते हैं। राज्य वित्ता आयोग की अनुषंसा पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद करध्फीस संग्रहण सरकार के निदेषानुसार कर सकता है।

ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद क्रमषः ग्राम पंचायत के नाम से ग्राम पंचायत निधि, पंचायत समिति के नाम से पंचायत समिति निधि एवं परिषद के नाम से जिला परिषद निधि का गठन करते हैं, और जमा खाते में अपनी अपनी राषियां जमाध् व्यय कर सकते हैं।

पंचायत का बजट

बजट में संभावित सभी आय एवं व्यय का वार्षिक आकलन होता है, जिसमें प्रस्तावित कार्यक्रम का वित्तीय विवरण प्रकट होता है। पंचायती राज संस्थाओं के लिए बजट उसके एक वर्ष के कार्यक्रम का स्वीकृत दस्तावेज है। कोई भी व्यय बिना बजट के अनुमोदन के नहीं हो सकता।

अधिनियम में ग्राम पंचायत के बजट का प्रावधान है, जिसके आलोक में प्रत्येक ग्राम पंचायत अपना वार्षिक बजट अर्थात् आय एवं व्यय का वार्षिक बजट तैयार करेगी और बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से इसे अनुमोदित कराएगी। उस बैठक के लिए अन्य बैठकों की भाँति कम-से-कम कुल सदस्यों के 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अधिनियम के आलोक में बजट एवं एकाउंटस् रूल का गठन प्रक्रियाधीन है। नियमावली के गठन तक बिहार ग्राम पंचायत लेखा नियमावली, 1949 के आलोक में मुखिया द्वारा अगले वित्ताय वर्ष के लिए फारम संख्या- 6 में बजट प्राक्कलन तैयार किया जाएगा एवं प्रतिवर्ष 15 फरवरी तक स्वीकृत कराया जाएगा। वित्ताय वर्ष 1अप्रैल से प्रारम्भ होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक का होता है।

पंचायत का लेखा

लेखाकरण ऐसी पद्धति है जिसका प्रयोग किसी भी संगठन के लेन-देन संबंधी कार्यों का रिकार्ड रखने, इन्हें वर्गीकृत करने और इन्हें सारणीबद्ध रूप से सम्प्रेषित करने के लिए किया जाता है। ग्राम पंचायतों को अपने उद्येश्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न स्रोतों से निधियों की प्राप्ति होती है। पंचायतों के लिए जरूरी है कि वह लेखाकरण संबंधी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुव्यवस्थित लेखाकरण प्रक्रिया का अनुसरण करें।

पंचायती राज संस्थाओं में स्वस्थ, बेहतर एवं पारदर्शी लेखा प्रणाली लागू करने के उद्येश्य से पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार एवं भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा पंचायतों के लिए माडल एकाउंटिंग सिस्टम निर्धारित किया गया है। इसमें सरल प्रपत्र निर्धारित किए गए हैं। माडल एकाउंटिंग सिस्टम कम्प्युटराईज्ड प्रणाली है। इस प्रणाली में सूचना एवं संचार तकनीक के माध्यम से वित्ताय प्रतिवेदन बनाने में सुविधा होगा।

राज्य सरकार ने अधिसूचना संख्या- 4868 दिनांक- 05.07.2010 द्वारा बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-30, 58 एवं85 के तहत राज्य के ग्राम पंचायतों, पंचायत समिति एवं जिला परिषद्ों द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निर्धारित माडल एकाउंटिंग सिस्टम प्रपत्र में 01.04.2010 से लेखा संधारण का निर्णय लिया गया है। किसी भी ग्राम पंचायत के लेखा के अंकेक्षण (आडिट) भारत के महालेखापरीक्षक अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा प्रतिवर्ष किया जाएगा।

पंचायतों की जवाबदेही

पंचायतें स्थानीय क्षेत्रों की प्रतिनिधि सरकारें हैं। इन संस्थानों के निर्वाचित प्रतिनिधि, जिस प्रकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं,उन सभी के लिए वे स्वयं जवाबदेह भी हैं। इनकी जवाबदेही दो स्तरों पर होती है। पंचायतों को राज्य सरकार से निधियाँ मिलती हैं। अतः वह अपनी राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह होती है। पंचायतें लोकतांत्रिक संस्थान हैं। अतः इनकी मुख्य जिम्मेदारी उन लोगों के प्रति है जिन्होंनें इन्हें चुना है। इन दोनों स्तरों पर इनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों को अपनी गतिविधियों के संबंध में बेहद सजग रहना है।

पारदर्शिता

पंचायतों को अपने वित्तीय लेन-देन के संबंध में पारदर्शिता (स्पष्टता) बनाई रखनी है। सूचना अधिकार अधिनियम के अनुसार, कोई भी नागरिक पंचायत के किसी भी वित्तीय लेन-देन से संबंधित सूचना की मांग कर सकता है। जब कभी ऐसी सूचना की मांग की जायें, तो पंचायतों को बिना विलंब किए तत्काल समस्त सूचना प्रदान करनी है।

मुखिया, उप मुखिया द्वारा त्याग-पत्र

मुखिया या उप मुखिया जिला पंचायत राज पदाधिकारी को स्वयं लिखकर अपने पद से त्याग-पत्र दे सकता है। जिला पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा त्याग पत्र प्राप्ति के सात दिनों के अंदर यदि मुखिया या उप मुखिया द्वारा स्वयं लिखकर त्यागपत्र वापस नहीं लिया जाता है,तो त्यागपत्र प्राप्ति की तिथि से आठवें दिन से प्रभावी हो जायेगा।

मुखिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

मुखिया को ग्राम पंचायत के मतदाताओं की विषेष तौर से बुलाई गई बैठक में साधारण बहुमत (अर्थात् कुल मतदाताओं का 50प्रतिशत1) से अविश्वास मत पारित कर हटाया जा सकता है। ऐसी विशेष बैठक हेतु ग्राम पंचायत के कुल मतदाताओं का न्यूनतम पाँचवा भाग यानि 20 प्रतिशत मतदाता एक आवेदन में हस्ताक्षर करके जिला पंचायत राज पदाधिकारी से अनुरोध करेंगे। जिला पंचायत राज पदाधिकारी बैठक की नोटिस जारी होने की तिथि के 15 दिन के अंदर विशेष बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा की जाएगी। परन्तु अविश्वास प्रस्ताव मुखिया के निर्वाचित होने (प्रथम बैठक यानि शपथ ग्रहण) के प्रथम दो वर्षों तक तथा ग्राम पंचायत के कार्यकाल के अंतिम छह महीनों के शेष रहने के दौरान नहीं लाया जा सकता है। नियमानुसार मुखिया का अविश्वास प्रस्ताव यदि पारित नहीं होता है तो अगले एक वर्ष की कालावधि के भीतर पुनः अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।

उप मुखिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

उप मुखिया को ग्राम पंचायत की विषेश तौर पर इस प्रयोजन से बुलाई गई बैठक में मुखिया सहित निर्वाचित कुल ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या में से साधारण बहुमत से हटाया जा सकता है। ऐसी विशेष बैठक बुलाने हेतु ग्राम पंचायत के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या के कम-से-कम एक तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर से आवेदन मुखिया को दी जाएगी। आवेदन प्राप्त होने की तिथि से सात दिनों के अंदर मुखिया ग्राम पंचायत कार्यालय में इस प्रस्ताव पर विचार हेतु विशेष बैठक बुलाकर उस बैठक की अध्यक्षता करेगा। मुखिया की तरह ही उप मुखिया के विरूद्ध भी पदावधि (प्रथम बैठक यानि शपथ ग्रहण) के पहले दो वर्षों तथा कार्यकाल के अंतिम छह महीनों के दौरान अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। नियमानुसार उप मुखिया का अविश्वास प्रस्ताव यदि पारित नहीं होता है तो अगले एक वर्ष की कालावधि के भीतर पुनः अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।

मुखिया-उपमुखिया को सरकार द्वारा हटाया जाना

अधिनियम के प्रावधान के अनुसार सरकार के विचार में यदि कोई मुखिया अथवा उप मुखिया बिना समुचित कारण के तीन लगातार बैठकों में अनुपस्थित रहने या जानबूझकर इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों एवं कर्तव्यों को करने से इंकार या उपेक्षा करने, शक्तियों का दुरूपयोग करने, कर्तव्यों के निर्वहन में दुराचार का दोषी पाए जाने या शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम होने, किसी आपराधिक मामले का अभियुक्त होने के कारण छह माह से अधिक फरार हो जाने का दोषी हो तो ऐसे मुखिया या उप मुखिया को स्पष्टीकरण हेतु समुचित अवसर प्रदान करने के उपरांत सरकार हटा सकती है। निहित शक्तियों के दुरूपयोग या अपने दायित्वों के निर्वहन में दुराचार का दोषी पाए जाने के फलस्वरूप हटाये गए मुखिया या उप मुखिया हटाये जाने की तिथि से पंचायत निकायों के किसी भी निर्वाचन में अगले पाँच वर्षों तक उम्मीदवार होने का पात्र नहीं होगा। शेष आरापों के आधार पर हटाया गया मुखिया या उप मुखिया या ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में उसकी शेष अवधि के दौरान पुनः निर्वाचन का पात्र नहीं होगा।

ग्राम पंचायत के सदस्यों का त्यागपत्र

ग्राम पंचायत का कोई भी सदस्य ग्राम पंचायत के मुखिया को स्वयं लिखकर अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे सकता है। सदस्य त्यागपत्र देने की तिथि से सात दिनों के अंदर अपना त्यागपत्र स्वयं लिखकर वापस मुखिया से ले सकता है। यदि सदस्य सात दिनों के अंदर त्यागपत्र वापस नहीं लेता है तो उसका पद त्यागपत्र की तिथि से सात दिन की समाप्ति पर रिक्त हो जाएगा।

swatva

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