जीविकोपार्जन का माध्यम बनेगी मिथिला की लोक कलाएं- जीवेश कुमार

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दरभंगा : बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं आईटी मंत्री जीवेश कुमार ने कहा की मिथिला क्षेत्र के प्राचीन लोक कलाओं का संवर्धन संरक्षण कर उसे जीविकोपार्जन का माध्यम बनाया जाएगा। वे कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के सभागार में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित मिथिला लोकमंथन सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मिथिला लोकमंथन ने कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के इस दौर में भी कला सर्जन के माध्यम से जीविकोपार्जन का जो प्रयास किया है यह अनुकरणीय है। इस काल में मिथिला लोक मंथन की ओर से लोकगीत, लोक संस्कृति, पेंटिंग, नाटक, सीकी आर्ट, मिथिला अक्षर कला, अंग्रेजी बोलना, कुकिंग प्रशिक्षण जैसे 20 क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया गया। समारोह में प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों व प्रशिक्षकों को मंत्री ने सम्मानित किया।

समारोह की अध्यक्षता संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शशी नाथ झा ने की। सम्मान समारोह का उद्घाटन करते हुए प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक कृष्ण कांत ओझा ने कहा कि मिथिला लोक मंथन के संयोजक कन्हैया चौधरी ने विगत 2 वर्षों के प्रयास से कला संरक्षण संवर्धन के साथ ही इसे रोजगार का अवसर बनाने का एक मॉडल दिया है, जो अनुकरणीय है।

समारोह के मुख्य वक्ता प्रोफेसर श्रीपति त्रिपाठी ने कहा कि मिथिला में ऐसे प्रात कई प्राचीन लोक कलाएं हैं जिनका वैश्विक स्तर पर मांग हो सकता है। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉक्टर कन्हैया चौधरी ने कहा कि हमारा यह प्रयास जारी रहेगा। इस अवसर पर लोक मिथिला लोकमंथन द्वारा प्रशिक्षित कलाकारों ने मोबाइल के कारण उत्पन्न समस्याओं पर मूर्ख नाट्य प्रस्तुति की वही बारहमासा गीत भी प्रस्तुत किया गया।

swatva

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