8 नवंबर : दरभंगा की प्रमुख ख़बरें

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प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक

सी एम कॉलेज,दरभंगा के स्नातकोत्तर प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की द्वितीय आंतरिक परीक्षा 16 से 22 नवंबर, 2019 के बीच पूर्वाह्न 9:30 से 12:00 बजे के बीच दो पालियों में आयोजित की जायेगी। वहीं स्नातक प्रथम खंड की जांच परीक्षा 9 एवं 10 दिसंबर,2019 को पूर्वाह्न 9:30 से 12:30 के बीच दो पालियों में होगी। उक्त परीक्षा में अनुपस्थित छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय परीक्षा प्रपत्र नहीं भरने दिया जाएगा।
उक्त आशय का निर्णय आज महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ मुश्ताक अहमद की अध्यक्षता में संपन्न विभागाध्यक्षों की बैठक में लिया गया,जिसमें प्रो विश्वनाथ झा,प्रो इंदिरा झा, डॉ अवनि रंजन सिंह,डा जिया हैदर,डॉ आर एन चौरसिया,प्रो गिरीश कुमार, डॉ जफर आलम,डॉ राजानंद झा, डॉ अनुपम कुमार सिंह, डॉ रुद्रकांत अमर, डॉ वासुदेव साहु, प्रो रागिनी रंजन तथा प्रो अखिलेश राठौर आदि उपस्थित थे।

परिचयात्मक सत्र का हुआ आयोजन

दरभंगा : विश्वविद्यालय के जुबिली हॉल में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा बीएड 2019-20 में नामांकित छात्र अध्यापकों का प्रातः 11:00 बजे से परिचयात्मक सत्र का आयोजन किया गया। बतौर मुख्यअतिथि के रूप में कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने छात्र अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र एक दीक्षारंभ है। जिसमें सभी सामूहिक रूप से संकल्पित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र-अध्यापकों को अपने शिक्षकों और साथियों के साथ शिक्षा के विभिन्न बिंदुओं पर वार्तालाप करने से भी कई शैक्षणिक विषयों का समाधान करना चाहिये।

यह पाठ्यक्रम का अतिरिक्त विषय होना चाहिए जिससे छात्रों के मानसिक स्तर एवं उनका मनोवल और ऊँचा हो। इसके लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है। सर्वप्रथम छात्र-अध्यापकों में एक उत्तम शिक्षक बनने की लालसा होनी चाहिए तभी आप देश हित मे बेहतर कार्य कर सकते हैं । दूरस्थ शिक्षा निदेशालय विषयों की दृष्टि से नामांकन संख्या एवं बाहरी संपर्क की दृष्टि से काफी आगे बढ़ रहा है। प्रो. सिंह ने नव छात्र अध्यापकों को उन्होंने उज्वल भविष्य की कामना और शुभकामनाएं दी। सवर्प्रथम कार्यक्रम के आरंभ में मंचासीन सभी अतिथियों को बुके देकर स्वागत किया गया तत्पश्चात दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। अतिथियों का स्वागत करते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. सरदार अरविंद सिंह ने कहा कि उद्योगों में सर्वप्रथम परिचयात्मक सत्र होता था। सर्वप्रथम शिक्षा के क्षेत्र में अमेरिका में परिचयात्मक सत्र हुआ किंतु यह परिचयात्मक सूत्र हमें अपने कार्यकाल से जोड़ेगा। शिक्षा का प्रथम अध्याय ही परिचयात्मक होता है । हमें आगे लिए जाने वाले ज्ञान को यह सत्र अग्रसर करता है।

एससीईआरटी के पूर्व निदेशक एवं यूनीसेफ के शैक्षिक सलाहाकार डॉ. एस. ए. मोईन ने शिक्षा के स्तर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिहार में अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए दूरस्थ शिक्षा की स्थापना हुई। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय आज बिहार में उत्तम प्रशिक्षण संस्थान बन चुका है और यहाँ से प्रशिक्षित शिक्षकों पर ही बच्चों के विकास का दायित्व है । शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए यह संस्थान कार्यशाला एवं प्रत्यक्ष संपर्क कार्यक्रम भी आयोजित करता है। छात्र-अध्यापकों को एक ऐसा शिक्षक बनना है जिससे शिक्षकों को छात्र हमेशा याद रखें । शिक्षक छात्रों के साथ अच्छा और बेहतर कार्य करें, अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों से सीखे ।

निदेशालय में शिक्षक आपके हर उस त्रुटि को दूर करने की कोशिश करेंगे जिससे आप अनभिज्ञ है। डॉ. जाकिर हुसैन शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, दरभंगा के उप-प्राचार्य डॉ. डी. एन.सिंह ने छात्र अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संस्था को जब आपने चुना है तो अवश्य ही दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से आप बेहतर शिक्षक बनकर जाएंगे । यदि आप शिक्षा में गुणवत्ता चाहते हैं तो नई तकनीकी की जानकारी अवश्य ही लेनी चाहिए अन्यथा शिक्षा के बदलाव के अनुसार आप बहुत आगे नहीं चल सकते । कठोर साधना ही बेहतर शिक्षक बनने का साधन है। निदेशालय के शिक्षकों से आप लाभान्वित होंगे, शिक्षण में आने वाली कठिनाइयों का समाधान आपको यह प्रशिक्षण देगा । आप अपने छात्रों का सही विकास मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों से ही कर सकते हैं, इसमें बीएड का प्रशिक्षण आप सभी के लिये काफी लाभकारी होगा । यह परिचय सत्र आपको अपने साथियों एवं शिक्षकों से निकटता लाने में अहम भूमिका निभाएगा । उन्होंने यह भी कहा कि बीएड पांच सफलताओं का मार्ग जिसमें प्रेरण, प्रतिज्ञा, परिश्रम, प्रबंधन एवं प्रोत्साहन आते है महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन उप-निदेशक डॉ. शम्भू प्रसाद ने तथा मंच संचालन सहायक निदेशक डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने किया।

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