एसडीआरएफ तत्पर होती तो बच जाती मां, बेटा और बेटी

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भागलपुर : शाहकुंड थाना क्षेत्र के लतीपुर गांव के पास बरसाती नदी में डूब रही कार में बैठी मां अपनी आंखों के सामने बेटे और बेटी को मरता देखती रही लेकिन कुछ न कर पाने की विवशता में खुद भी जान दे बैठी। वहीं बाहर बच निकला पिता पूरी रात सोचता रहा कि यदि एसडीआरएफ की टीम समय से आ जाती तो शायद उसका परिवार बच जाता।
यह आरोप है उस बेबस पिता और पति किसलय का जो पूरी रात स्थानीय प्रशासन के साथ नदी के किनारे बैठा एसडीआरएफ टीम के खगड़िया से आने का इंतजार करता रहा और सोचता रहा..काश टीम जल्दी आ जाती और मेरा परिवार बच जाता। पूरी रात वह दुहराता रहा, “मेरे कानों में डूबती कार में छूट गये बेटे की आवाज गूंज रही है—पापा मुझे बचा लो।”
बिलखते पिता ने कहा—“एसडीआरएफ की टीम तो नहीं आई लेकिन प्रखंड प्रशासन की तत्परता से पूरी रात स्थानीय गोताखोरों की मदद से कार को ढूंढने का प्रयास किया गया। सुबह हुई तो गोताखोरों ने कहा कि कार मिल गई। घोर हताशा के बीच उम्मीद जगी लेेकिन बहुत जल्द ही भयानक मंजर सामने आ चुका था। मालूम हो कि शाहकुंड थाना क्षेत्र के लतीपुर गांव के पास रविवार की देर रात धमनी नदी में एक कार गिर गयी जिससे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। शहकुंड थाना क्षेत्र के नयागांव वासी किसलय कुमार पत्नी रेखा देवी और बेटा-बेटी के साथ नैनो कार से मुंगेर जिले के असरगंज की ओर जा रहे थे कि रास्ते में लतीपुर गांव के निकट अचानक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर से धमनी नदी में गिर गई। कार चला रहे किसलय कुमार किसी तरह से तैरकर नदी से बाहर निकल गए और घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी।

 

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