पावन कार्तिक पूर्णिमा पर श्रध्दालुओं ने गंगानदी में डुबकियां लगाकर पास के मंदिरों में पूजा-अर्चना किया

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बाढ़ : पावन कार्तिक माह के अवसर पर उत्तर वाहिनी गंगा नदी के तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में डुबकियां लगाकर पास के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। चतुर्मास की समाप्ति एवं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अनुमंडल के सुविख्यात उमानाथ,अलखनाथ सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड पड़ी। बिहार का काशी(बनारस)के नाम से प्रसिध्द बाढ़ अनुमंडल के उत्तरायण भागीरथी गंगा न दी में स्नान करने का विशेष महत्व धर्मशास्त्रों में माना गया है।

कार्तिक पूर्णिमा पर उत्तरायण गंगानदी में स्नान कर उमानाथ महादेव को जलाभिषेक करने जाते श्रध्दालु

इस कारण पूरे राज्य के कोने-कोने से यहां श्रद्धालुओं भागीरथी गंगा नदी में स्नान करने के लियेआया करते हैं और मनोकामना सिध्द 9 नाथों में एक नाथ “उमानाथ- महादेव” की लोग पूजा-अर्चना किया करते हैं।शास्त्रों के अनुसार यहां भगवान “उमानाथ शंकर” की पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामनायें पूर्ण होती है। इस कारण बाढ़ के सुविख्यात “उमानाथ-महादेव” की गणना काशी(बनारस) के भगवान विश्वनाथ शंकरजी से धर्मग्रन्थों में किया गया है।

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एसडीएम सुमित कुमार एवं एसपी अंबरीश राहुल के नेतृत्व में बाढ़ थानाध्यक्ष संजीत कुमार सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों ने अनुमंडल के विभिन्न गंगा घाटों पर प्रशासनिक व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त किया गया और वैश्विक महामारी कोरोना के लिये जारी किये गये सरकारी गाइडलाइन का अनुपालन कराया गया।कोविड-19 को लेकर इस बार भीड़ की संख्या कम देखी गई।अगले बार से इस बार आधी ही भीड़ देखी गई।वही ट्रेन का परिचालन सुचारू रूप से नही होने के कारण भी कार्तिक पूर्णिमा में इसका काफी असर पड़ा।

बाढ़ से सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट

swatva

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