कक्षा 9 की छात्रा ने तैयार किया देशी फ्रीज

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पश्चिमी चम्पारण/बगहा : प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और हमारे आसपास मौजूद जैविक पौधों का उपयोग कर घरेलू उपयोग की वस्तुएं तैयार करने का एक प्रोजेक्ट बगहा की छात्रा खुशी कुमारी ने तैयार किया है। उसका प्रोजेक्ट बिहार के गांवों में कुटीर उधोग को बढ़ावा देने में भी सहयोग देगा। प्लास्टिक को जो लोग दैनिक व रोजमर्रा के लिए एक आवश्यक वस्तु मानते हैं, उनके लिए बगहा की खुशी कुमारी ने अनोखा और पर्यावरण फ्रेंडली विकल्प प्रस्तुत किया है।

बगहा की खुशी कुमारी वर्ग 9 की छात्रा है। प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर उसके प्रोजेक्ट को न केवल जिला बल्कि राज्यस्तर पर सराहना मिली है। खुशी ने अपने घर के आसपास स्थित खेतों, खास कर रेता और जंगलों में मिलने वाले घास विशेषकर राडी, खर-खरई, मूंज, पटेल आदि से दौरी, डलिया, मोनिया को हॉटपॉट की तरह तैयार किया। एक विशेष प्रकार के पात्र एवं फल-सब्जियों को कुछ दिनों तक ताजा रखने के लिए खुशी ने देसी फ्रिज को डिज़ाइन किया। यही नहीं, उसने एक विशेष प्रकार के सीकौता एवं हाथ की चूड़ी व कलमदान तक बनाई तथा उनका परीक्षण भी किया। मेज पर शोभा देने वाला कछुआ भी इन्हीं जैविक पदार्थों का उपयोग कर उसने तैयार किया है। उसने बताया कि हॉटपॉट में रखी रोटी व सब्जियां इन घासों से तैयार पात्रों में कुछ ज्यादा देर गर्म रहती हैं और बर्बाद नहीं होती। फ्रीज में रखे जाने वाले सामान की तुलना करते हुए, उसने बताया कि फ्रीज में जो सामान रखने पर जैसा पाया जाता है, ठीक उसी प्रकार उसके द्वारा बनाये गए मोनी, डलिया में बंद करके रखे सामान फ्रिज की तरह ताजे रहते हैं। उसने बताया कि खरपतवार से तैयार किए गए इन पदार्थों से प्रदूषण नहीं फैलता। ये बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है जो कुछ दिनों के बाद नष्ट हो जाते हैं। अगर इन्हें पानी से सुरक्षित रखा जाए तो 2 से 5 वर्षों तक चल सकते हैं। खुशी कुमारी का मानना है कि अगर इसे प्रधानमंत्री कौशल योजना से जोड़ा जाए तो यह हस्तकला एक कुटीर उधोग का रूप ले सकती है।

राजन कुमार

swatva

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